Snake: UP का ऐसा गांव जहां बच्चों के खिलौने हैं जिंदा सांप, जहर भी हो जाता है बेअसर

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Snake: UP का ऐसा गांव जहां बच्चों के खिलौने हैं जिंदा सांप, जहर भी हो जाता है बेअसर

Snake: सुनने में आपको थोड़ी हैरानी हो सकती है। आप इसे कोई चमत्कार या वरदान भी कह सकते हैं

लेकिन यह सच है कि जिस सांप को देखकर बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाएंगे,

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उन सांपों से जौनपुर के खेतासराय क्षेत्र में सोंगर गांव के बच्चे बाल सखा की तरह खेलते हैं, चूहल करते हैं।

चीतर प्रजाति के ये खास सांप इस गांव में खिलौनों की तरह रहते हैं। …और तो और, मान्यता है

कि दूसरे गांव के भी किसी व्यक्ति को ‘चीतर’ डंस ले तो सोंगर गांव की सरहद में दाखिल होते ही

उस व्यक्ति में सांप का जहर बेअसर हो जाता है। दावा है कि वह पलभर में चंगा हो जाता है।

सोंगर व चीतर का है पुराना नाता

सोंगर गांव और चीतर प्रजाति के सांप का नाता बड़ा पुराना है। गांव के एमआई बेग कहानी सुनाते हैं,

छह सौ साल पहले शर्की राजवंश के दौरान वर्ष 1422 में नेत्रहीन सूफी संत हजरत कुतुबुद्दीन इस रास्ते से गुजर रहे थे।

उनके उस्ताद हजरत नजमुद्दीन भी थे। हजरत कुतुबुद्दीन के उस्ताद ने उन्हें यहीं रहने को कहा।

एक दिन चीतर प्रजाति का सांप हजरत कुतुबुद्दीन के पैरों के नीचे पड़ गया। सर्प ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की

तो उन्होंने सर्प को इस गांव में केंचुए जैसा स्वभाव का होने का शाप दे दिया।

इसका उल्लेख सैयद इकबाल अहमद जौनपुरी की पुस्तक ‘तारीख सलातीन शर्की और

सूफियाए’ में भी है। तभी से चीतर सांप इस गांव में प्रभावहीन हो गया।

चीतर डंसने पर पहुंचते हैं दूसरे गांवों से भी पीड़ित

ऐसी धारणा है कि चीतर सांप का डंसा व्यक्ति बेहोशी की हालत में सोंगर गांव की सरहद में पहुंचते ही हिलने-डुलने

लगता है। जल्द ही स्वस्थ भी हो जाता है। यही कारण है कि कई बार देर रात में भी दूसरे गांवों के लोग पीड़ित को यहां

लेकर आते हैं। जून से सितंबर तक पीड़ितों की संख्या अधिक रहती है।

मवई के ग्राम प्रधान रामप्रसाद यादव बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व उन्हें चीतर सांप ने काटा था।

कुछ देर बाद उन्हें चक्कर आने लगा। परिजन सोंगर गांव लेकर पहुंचे। सरहद में घुसते ही वह चंगे हो गए।

बच्चों के लिए दोस्त है चीतर

चीतर सांप के साथ खेल रहे गांव के मोहम्मद, अहमद और कल्लू का कहना है कि उन्हें चीतर सांप से डर नहीं लगता।

सभी लड़के चीतर सांप से खेलते हैं। ऐसे सांपों के साथ खेलने पर उन्हें आनंद मिलता है।

खेलते समय सांप उन्हें काटता भी नहीं। आसपास के गांवों वालों को

सोंगर के बच्चों को चीतर सांप के साथ खेलते देख अचरज होता है।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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