उत्तर प्रदेश में एक हजार ग्राम प्रधानों की छिनी कु्र्सी, नगर निकाय चुनाव के पहले लगा तगड़ा झटका
उत्तर प्रदेश में नगर निकाय (Municipal Election) चुनावों के पहले यूपी सरकार ने बड़ा ऐलान कर दिया है.
योगी आदित्यनाथ सरकार ने 18 नई नगर पंचायतों (Nagar Panchayat) के गठन और इतनी ही
नगर पंचायतों का सीमा विस्तार कर दिया है. दो नगर पालिका परिषद (Nagar Palika Parishad) की सीमाएं
भी बढ़ाई गई हैं. नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम सीमा विस्तार से 1 हजार से ज्यादा
ग्राम प्रधान और 10 हजार से वार्ड सदस्यों का कार्यकाल 5 की जगह डेढ़ साल में खत्म हो गया.
एक हजार ग्राम पंचायतों को नगर निकायों में शामिल करने के फैसले से ग्राम प्रधानों और वार्ड सदस्य को ये झटका लगा
है. अब इन क्षेत्रों में नगर पालिका औऱ नगर परिषद के तहत चुनाव भी होंगे.
पंचायत चुनाव में BJP को मिली थी बड़ी जीत
दरअसल, पिछले साल अप्रैल में ग्राम पंचायत चुनाव हुए थे.इसमें बीजेपी ने ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत
और जिला पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर जीत हासिल की थी. मगर यूपी सरकार ने 100 से ज्यादा
नई नगर पंचायतों का गठन कर दिया है. जबकि 122 नगर निकायों का सीमा विस्तार
इन डेढ़ सालों में किया है.इससे 45 जिलों की करीब 1 हजार ग्राम पंचायतों का वजूद ही नहीं रहा.
ग्राम प्रधान पसोपेश में
पंचायतीराज विभाग का कहना है कि ग्राम प्रधान पद के लिए ग्राम पंचायत का अस्तित्व में होना
और उस पंचायत का निवासी होना आवश्यक शर्त है. नगर निकायों में शामिल करने से
ग्राम पंचायत का कार्यकाल ही समाप्त हो गया है. ऐसे में निर्वाचित ग्राम प्रधान के अधिकार स्वत: ही
समाप्त हो जाते हैं. हालांकि अभी शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है.
लड़ सकते हैं निकाय चुनाव
ग्राम पंचायतों के नगर निकाय में आने से ऐसे प्रधान या प्रधान पति जो चुनाव हार चुके थे,
उनकी बांछें खिल गई हैं. वो नगर पालिका चेयरमैन, नगर पालिका सभासद या नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे आगामी
चुनाव में ताल ठोकने का मन बना रहे हैं. हालांकि पसीना बहाकर प्रधानी का चुनाव जीतने वाले चिंता हैं.
उन्हें लगता है कि इतने कम कार्यकाल में विकास कार्य न होने को लेकर जनता की नाराजगी उन्हें झेलनी पड़ेगी.
बीजेपी की बड़ी तैयारी
वहीं बीजेपी ने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं.
भाजपा उत्तर प्रदेश के तमाम शहरी निकायों में जीत के लिए नवंबर के अंत तक हर दरवाजा खटखटाएगी.
इस दौरान पुरानी वोटर लिस्ट से मिलान करते हुए हर घर में नए वोटर खोजे जाएंगे.
नए मतदाताओं के नाम सूची (वोटर लिस्ट) में शामिल कराएंगे. सरकार के विकास कार्यों का लेखाजोखा घर-घर
पहुंचाएंगे. हर शनिवार और रविवार को विशेष मतदाता अभियान चलेगा
