Bathing: माघी पूर्णिमा में श्रद्धालुओं ने लगाई डूबकी, सन्तों ने किया शाही स्नान
Bathing: माघी पूर्णिमा के अवसर पर छितौनी- बगहा रेल सह सड़क पुल के नीचे नारायणी नदी में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
वही भक्ति आन्दोलन मंच एंव श्री केशरी नन्दन अ०चेतना न्यास के तत्वावधान में सन्त समागम का भी आयोजन किया गया।
शुक्रवार को गंगा आरती , भजन व सत्संग के बाद शनिवार को भारी संख्या में सन्तों ने शाही स्नान किया। फिर दोपहर तक सन्त सम्मेलन का सम्पन्न हुआ।
हिन्दू धर्म ग्रन्थों में माघ पूर्णिमा के दिन स्नान- दान का बहुत महत्व है। इस दौरान भगवान श्रीहरी विष्णु व माता लक्ष्मी जी जल में निवास करते है, तथा चन्द्रमा पूर्ण अवस्था में होता है।
सूर्योदय के समय स्नान करने से रोग व पाप दोनों से मुक्ति मिलती है। इसको लेकर आस- पास के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शनिवार को सुबह 6 बजे नारायणी नदी के पनियहवा घाट पर पहुंचकर स्नान कर साधु- सन्तों समेत असहायों को दान दिया।
वही भक्ति आन्दोलन मंच एंव श्री केसरी नन्दन अ०चेतना न्यास के तमाम सन्तों भजन करते हुये पनियहवा घाट पहुँच कर स्नान किया।
आयोजन स्थल पर सन्त सम्मेलन में आन्दोलन मंच के अध्यक्ष कथावाचक राजर्षि रामनयन दास व विश्व हिन्दू महासंघ के अध्यक्ष महन्थ बालक दास, श्री केशरी नन्दन न्यास बिहार प्रान्त के अध्यक्ष महन्थ महेशदास, लाल बहादूर शास्त्री आदि ने मन्दिर , मठों में साधू सन्तों की सख्या घटने की चिन्ता करते हुये सन्तशिरोमणि रविदास के कदमों पर चलने का आह्वाहन किया।
उन्होने कहा कि साधू सन्त धर्म व समाज के लिये हमेशा तत्पर रहता है। समाज में एक उच्च चरित्र के साथ जीवन यापन कर हमेशा लोक कल्याण के लिये ही कामना करता है।
इस दौरान महन्थ जंगबहादूर दास, महंथ कुन्जबिहारी दास, महन्थ भीम दास, महन्त त्यागी दास, हिरामन यादव आदि तमाम सन्त व सन्यासी उपस्थित रहे।
