Anganwadi केन्द्रों के प्रयास से helth हुए 12 हजार से अधिक कुपोषित बच्चे

Date:

spot_img
spot_img

Date:

spot_img
spot_img

Anganwadi केन्द्रों के प्रयास से helth हुए 12 हजार से अधिक कुपोषित बच्चे

Anganwadi केन्द्रों के स्तर से मंडल में 12 हजार 651 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को नया जीवन मिला। अब वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से बुधवार को इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोष्ठी में विशेषज्ञों ने कुपोषण से जुड़ी जानकारियां साझा कीं।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनको स्वस्थ रखने केलिए यह अच्छा प्रयास है। इस तरह के विचार विमर्श समय अंतराल पर जरूर होने चाहिए।

- Advertisement -
- Advertisement -

यह भी पढ़ें :Helth Insurance :आपके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेगा व्यापक स्वास्थ्य बीमा, जानें किसे मिल सकता है इसे और क्या हैं फायदे

इस मौके पर बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से बताया गया कि जून माह में मिशन संभव अभियान चलाया गया था। उस समय तक पूरे मंडल में 22 हजार से अधिक बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित थे।

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की मदद से चलाए गए अभियान के बाद अक्तूबर में 12 हजार से अधिक बच्चे स्वस्थ पाए गए। इसके पूर्व हरदोई में 4010, लखीमपुर खीरी में 3046, लखनऊ में 1446, रायबरेली में 2170, सीतापुर में 6829 और उन्नाव में 1481 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे थे।

कार्यक्रम में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक सरनीत कौर ब्रोका ने बच्चों के टीकाकरण, उनकी देखभाल के बारे में बताया। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी होते हैं।

यदि अभिभावक सक्षम न हो तो सभी को आगे बढ़कर योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें विभागों का आपसी समन्वय आवश्यक है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार ने पोषण सुविधाओं, गंभीर कुपोषित और कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के बारे में बताया।

इस मौके पर बाल पुष्टाहार विभाग की निदेशक ने मंडल में किए गए नए प्रयासों को सराहा। साथ ही प्रशस्ति पत्र देकर अच्छा कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया।

प्रदर्शनी में बताया गया, बच्चों को क्या खिलाएं

इस मौके पर प्रदर्शनी भी लगाइ्र गई। इसमें अलग – अलग स्टॉल पर जानकारियां दी जा रही थीं। जैसे बच्चों की अच्छी सेहत केलिए उनको क्या खिलाएं। कुपोषण में खासतौर पर बच्चे में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल की कमी हो जाती है।

यह भी पढ़ें :Insurance helth:अनहोनी से बचने के लिए ले रहे हैं हेल्थ इंश्योरेंस तो ध्यान में रखें यह पांच बातें

नतीजतन उनके शरीर और दिमाग का विकास रुक सकता है। ऐसे में बच्चे के खाने में साबुत अनाज, फल, दूध और भरपूर मात्रा में पानी देना आवश्यक है।

बच्चों को अर्द्धठोस यानी नरम आहार, तरल भोजन, जूस आदि भी नियमित रूप से देना चाहिए। साथ ही बताया गया कि चॉकलेट, टॉफी या चिप्स भी उनके लिए उपयोगी होते हैं।

Share This:
Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

Most Popular

More like this
Related

Arrested: अवैध शराब के साथ दो अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल बरामद

Arrested: अवैध शराब के साथ दो अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल...

Inauguration: गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा अब हाईटेक—₹918 लाख के अत्याधुनिक भवनों का लोकार्पण

Inauguration: गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा अब हाईटेक—₹918 लाख के...