Psychiatric diseases: 20-30 की उम्र में मनोरोगों के रहे हैं शिकार तो भविष्य में इस जानलेवा समस्या का हो सकता है खतरा
psychiatric diseases: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, यही कारण है
कि स्ट्रेस जैसी समस्याओं के कारण हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर स्थितियों में हार्ट की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है।
अध्ययनकर्ता सभी लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य के विशेष देखभाल की सलाह देते रहे हैं।
एक हालिया शोध में भी इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर अलर्ट किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों को 20-30 की आयु के बीच मानसिक स्वास्थ्य की समस्या रही है,
ऐसे लोगों में भविष्य में दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
इस शोध में अध्ययनकर्ताओं की टीम ने जोर दिया है कि मानसिक बीमारी वाले लोगों में एक साथ कई शारीरिक
समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोगों को विशेष देखभाल और बचाव की आवश्यकता है,
जिससे जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सके।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और हार्ट स्ट्रोक का खतरा
यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शरीरिक दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है।
शोधकर्ताओं ने दक्षिण कोरिया में रहने वाले 20-39 वर्ष की आयु के 65 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण
किया, जिनमें पहले दिल के दौरे या स्ट्रोक की कोई हिस्ट्री या जोखिम नहीं था। अध्ययन की शुरुआत में
लगभग 13% लोगों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पता चला। अन्य की तुलना में ऐसे लोगों में
अगले 8 वर्षों के दौरान दिल का दौरा या स्ट्रोक का जोखिम अधिक देखा गया।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि युवावस्था के दौरान स्ट्रेस-एंग्जाइटी या डिप्रेशन के शिकार लोगों में भविष्य में
हार्ट अटैक का खतरा, अन्य लोगों की तुलना में 58% अधिक था। वहीं इन लोगों में स्ट्रोक होने का 42% ज्यादा पाया गया।
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं की गंभीरता और प्रकार के आधार पर शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ा हुआ हो सकता है।
दिल के दौरे के शिकार ज्यादातर लोग पोस्टट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), सिज़ोफ्रेनिया,
बाइपोलर डिसऑर्डर या पर्सनालिटी डिसऑर्डर के शिकार रह चुके थे।
रोगियों की कम हो सकती है लाइफ एक्सपेक्टेंसी
शोध में पाया गया कि पीटीएसडी या खाने के विकार वाले लोगों में स्ट्रोक का जोखिम ज्यादा नहीं था
हालांकि जो लोग डिप्रेशन या स्ट्रेस के शिकार रहे थे, उनमें दिल के दौरे और स्ट्रोक दोनों का खतरा अधिक था।
सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रोफेसर और अध्ययन के शोधकर्ता चैन सून पार्क कहते हैं,
मानसिक स्वास्थ्य समस्या वाले मरीजों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी, अन्य लोगों की तुलना में कम हो सकती है,
इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि उनमें दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं को खतरा अधिक होता है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
शोधकर्ता कहते हैं, हमारे अध्ययन में यह भी पाया गया है कि बड़ी संख्या में युवा-वयस्कों में कम से कम एक मानसिक
स्वास्थ्य की समस्या है, जो उनमें दिल का दौरा और स्ट्रोक के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
सीडीसी के अनुसार, अकेले अमेरिका में 5 में से 1 वयस्कों को मानसिक बीमारी है,
25 में से 1 को सिज़ोफ्रेनिया या प्रमुख अवसाद जैसी गंभीर समस्या है।
यह भविष्य के लिए गंभीर सूचक है, जिसके लिए अभी से बचाव के उपायों का पालन शुरू कर देना चाहिए।
ऐसे लोगों को लाइफस्टाइल में सुधार करना बहुत आवश्यक है।
लाइफस्टाइल विकार आपमें हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम और भी बढ़ा देते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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