IAS:UP में घोटालों की जांच में फंसे आईएएस लेकिन नहीं हुई कार्रवाई, सालों से चल रहीं जांचें
IAS: यूपी में घोटालों के घेरे में आए कुछ आईएएस अफसरों को छोड़ दिया जाए
तो अधिकतर के खिलाफ सिर्फ जांचें ही चल रही हैं।
अधिकतर मामलों में देखा जाए तो एजेंसियों को पूछताछ या विवेचना की अनुमति समय से नहीं
मिल पाती है। इसके चलते सालों-साल जांच चलती रहती है
और अफसरों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। रिवर फ्रंट घोटाला,
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन पीएफ घोटाला, जेपीएनआईसी सेंटर घोटाला हो
या खनन घोटाला। इनमें नाम आने के बाद भी आईएएस
अफसरों के खिलाफ अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।
रिवर फ्रंट घोटाला
रिवर फ्रंट में 1434 करोड़ रुपए का काम हुआ। घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है।
उसे घोटाले में नाम आने वाले दो पूर्व मुख्य सचिवों आलोक रंजन और दीपक सिंघल से
पूछताछ करनी है। नियमानुसार इसके लिए नियुक्ति विभाग से अनुमति जरूरी है।
इसीलिए सीबीआई को बार-बार अनुमति मांगनी पड़ती है।
समय से अनुमति न मिल पाने की वजह से यह जांच पूरी नहीं हो पा रही है।
इसके चलते सीबीआई अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पा रही है।
खनन घोटाले में फंसे और तैनाती भी मिली
वर्ष 2009 बैच के आईएएस विवेक पर देवरिया में डीएम रहते हुए
बालू खनन से काली कमाई कमाने का आरोप लगा।
सीबीआई ने साल 2019 में विवेक के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
बी चंद्रकला, अभय कुमार सिंह, देवीशरण उपाध्याय और संतोष राय खनन घोटाले में नाम
आया। अभय कुमार सिंह के घर से तो 47 लाख रुपये बरामद किए गए।
यह रकम कहां से आई और कैसे आई, यह रहस्य ही बनकर रह गया।
खनन घोटाले में फंसी चंद्रकला से विभिन्न जांच एजेंसियां पूछताछ कर चुकी हैं।
इसके बाद भी इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कुछ तो सेवानिवृत्त हो गए और जो बचे हैं, उनको तैनाती मिल चुकी है।
पीएफ घोटाले में नाम आया
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन पीएफ घोटाला भी काफी चर्चित रहा है।
अभियंता स्तर के अधिकारी को छोड़ दिया जाए तो आईएएस अफसरों के खिलाफ इसमें कार्रवाई
नहीं हो पाई। जांच चलती रही और दो आईएएस अफसर सेवानिवृत्त भी हो गए।
महिला आईएएस अपर्णा यू तो पति को आंध्र प्रदेश में करोड़ों का ठेका दिलाने का आरोप में
फंसी हैं। अभी हाल ही में उन्हें जमानत मिली है। लखनऊ में निर्माणाधीन जेपीएनआईसी में
गड़बड़ी पर तत्कालीन एलडीए उपाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है,
लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई। चर्चा है कि उनकी फाइल ही नहीं मुहैया हो पा रही।
छोटों पर कार्रवाई बड़ों पर रहम
लखनऊ के होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड घटना में छोटों पर कार्रवाई छोड़ दी जाए
तो किसी भी बड़े पीसीएस-आईएएस पर कार्रवाई नहीं हुई।
आवास विभाग ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को पत्र लिख कर इस मामले के दोषी बड़े
अधिकारियों के कई बार नाम मांगे, लेकिन मामले को दबा दिया गया।
शासन के एक अधिकारी कहते हैं -‘जिस अवधि में नक्शा पास हुआ उस समय के उपाध्यक्ष और
सचिव व संयुक्त सचिव की भूमिका भी जांच होनी चाहिए।
इसीलिए बार-बार उनके नाम मांगे जा रहे हैं। लेकिन लखनऊ विकास
प्राधिकरण से कोई भी नाम अभी तक नहीं भेजा गया।’
योगी सरकार में निलंबित आईएएस, लेकिन हुए बहाल
-कुमार प्रशांत को डीएम फतेहपुर रहते जून 2018 में निलंबित किया गया।
-देवेंद्र कुमार पांडेय को उन्नाव में डीएम रहते हुए फरवरी 2020 में निलंबित किया गया।
-अमरनाथ उपाध्याय डीएम महराजगंज रहते निलंबित।
-टीके शिबू डीएम सोनभद्र रहते 31 मार्च 2022 को निलंबित।
-सुनील कुमार वर्मा डीएम औरैया रहते 4 अप्रैल 2022 को निलंबित।
