Cyber Flashing क्या है? लड़की को अश्‍लील तस्‍वीर भेजने के मामले में ब्रिटिश व्‍यक्ति दोषी करार

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Cyber Flashing क्या है? लड़की को अश्‍लील तस्‍वीर भेजने के मामले में ब्रिटिश व्‍यक्ति दोषी करार

Cyber Flashing: इंग्लैंड और वेल्स (England and Wales) में पहली बार 39 साल के एक व्यक्ति को ‘साइबर फ्लैशिंग’ (बिना मर्जी के अश्लील तस्वीरें भेजना) के लिए दोषी ठहराया गया है.

एसेक्स का रहने वाला ये आदमी, ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के तहत, एक किशोरी लड़की और एक महिला को उसके निजी अंगों की तस्वीरें भेजने के लिए दोषी पाया गया है.

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निकोलस हॉक्स को तब गिरफ्तार किया गया जब किसी ने उनकी भेजी अश्लील तस्वीरों का स्क्रीनशॉट पुलिस से शेयर कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक महिला ने व्हाट्सएप पर भेजी तस्वीर का स्क्रीनशॉट लिया और उसे पुलिस को दिखा दिया, जिसके बाद हॉक्स को पकड़ा गया.

11 मार्च को सुनाई जाएगी सजा

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने बताया कि तस्वीरों को 9 फरवरी को भेजा गया था और शिकायत भी उसी दिन दर्ज की गई. निकोलस हॉक्स ने 15 साल की लड़की को अश्लील तस्वीरें सेंड की थीं.

सोमवार को साउथेंड मजिस्ट्रेट की अदालत में उसने तस्वीरें भेजना के दो मामलों को स्वीकार किया. उसे सुनवाई में दोषी ठहराया गया और उसे हिरासत में भेज दिया गया है. उसे 11 मार्च को बासिलडन क्राउन कोर्ट में सजा सुनाई जाएगी.

रिपोर्टों के मुताबिक, हॉक्स पहले से ही एक रजिस्टर्ड यौन अपराधी था. पिछले साल, उसे 16 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ यौन गतिविधि और बेइज्जती करने के लिए दोषी ठहराया गया था.

‘Cyber Flashing’ क्या है?

साइबर फ्लैशिंग का मतलब है बिना पूछे किसी को अश्लील तस्वीरें या वीडियो भेजना. यह इंटरनेट के जरिए किया जाता है, जैसे कि मैसेज एप्स, सोशल मीडिया या एयरड्रॉप से भी.

ये तस्वीरें किसी को भी परेशान करने के लिए भेजी जा सकती हैं और यह गलत है. ये तस्वीरें इसलिए गलत हैं क्योंकि उन्हें भेजने से पहले उस शख्स की इजाजत नहीं ली जाती.

जिसे ये तस्वीरें मिलती हैं वो परेशान और घबरा सकता है. ये तस्वीरें उनकी निजी जिंदगी में दखलअंदाजी हैं और उन्हें बुरा महसूस करा सकती हैं.

इंग्लैंड के ईस्ट सीपीएस के सेफर मणि ने प्रेस से बात करते हुए साइबर फ्लैशिंग को “घिनौना अपराध” कहा. उन्होंने कहा कि ‘हमें खुशी है कि हम जल्दी से दो पीड़ितों को न्याय दिला पाए, जिससे पता चलता है कि नया कानून काम कर रहा है.’

सेफर मणि ने आगे कहा, ‘हर किसी को, चाहे वो कहीं भी हो, सुरक्षित महसूस करना चाहिए और उन्हें जबरदस्ती अश्लील तस्वीरें नहीं मिलनी चाहिए.’

सीपीएस अधिकारी ने भी साइबर फ्लैशिंग के शिकार लोगों से आगे आने और पुलिस को इसकी सूचना देने का आग्रह किया.

क्या है यूके का ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट

जनवरी 2024 में, इंग्लैंड में ऑनलाइन सुरक्षा कानून बनाया गया था, जिसमें कई तरह के ऑनलाइन अपराध शामिल हैं, जिनमें से एक साइबर फ्लैशिंग भी है.

इंग्लैंड और वेल्स में, 31 जनवरी से साइबर फ्लैशिंग गैरकानूनी हो गया. वहीं, स्कॉटलैंड में यह पहले से ही 2010 से गैरकानूनी है.

दुनियाभर में क्या है ‘Cyber Flashing’ लॉ

– ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में मई 2017 में एक कानून बनाया गया था जिसके मुताबिक बिना किसी की इजाजत उनकी निजी तस्वीरें लेना, उन्हें फैलाना या ऐसा करने की धमकी देना गैरकानूनी है.

– सिंगापुर में मई 2019 से बिना पूछे किसी को अश्लील तस्वीरें भेजना, यानी “साइबर फ्लैशिंग,” जुर्म है। ऐसा करने पर दो साल तक की जेल हो सकती है.

– भारत में सीधे तौर पर साइबर फ्लैशिंग कानून में नहीं है, लेकिन इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी 2000 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील कंटेंट भेजना या पब्लिश करना गैरकानूनी है. इसमें बिना पूछे किसी को अश्लील तस्वीरें भेजना भी शामिल है.

 

 

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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