Earthquake: 10 दिन-3 झटके, मैदान की तरफ खिसक रहा केंद्र! भूकंप के कारण खोजने में जुटे यूपी के विज्ञानी

Date:

spot_img
spot_img

Date:

spot_img
spot_img

Earthquake: 10 दिन-3 झटके, मैदान की तरफ खिसक रहा केंद्र! भूकंप के कारण खोजने में जुटे यूपी के विज्ञानी

Earthquake: दुनिया में कोई भी इलाका भूकंप के खतरे से सुरक्षित नहीं है।

यानी दुनियाभर में Earthquake के जोन-1 जैसी कोई जगह नहीं। वहीं,

- Advertisement -
- Advertisement -

भूवैज्ञानिकों में अब यह मंथन शुरू हो गया है कि क्या देश में भूकंपीय जोन के

पुनर्निर्धारण का समय आ गया है। इसकी वजह पिछले 10 दिनों में आए

Earthquake का एक छोटा व तीन बड़े झटके हैं। भूवैज्ञानिक इस संभावना को लेकर चिंतित हैं

कि क्या Earthquake का केंद्र भारत के मैदानी इलाकों की तरफ खिसक रहा है।

गत चार नवंबर को नेपाल में 6.4 तीव्रता का Earthquake आया था।

रात तकरीबन 12 बजे दिल्ली-एनसीआर से लेकर काशी और बिहार तक हिल गए थे।

यह भी पढ़ें :कहां आएगा अगला Earthquake, कितनी होगी तीव्रता? कानपुर के वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी

5 नवंबर, अगली सुबह भी 3.4 तीव्रता के झटके नेपाल स्थित उसी केंद्र से आए।

फिर 6 और 11 नवंबर को भी दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए।

इनकी धमक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी महसूस हुई।

Earthquake के इन लगातार झटकों को भूवैज्ञानिक कई रूपों में देख रहे हैं।

बीएचयू के भूविज्ञानी डॉ. संदीप अरोड़ा ने बताया कि इन केसों को

तकनीकी सफलता भी मानना चाहिए। हिमालय के क्षेत्रों में स्थापित केंद्र अब

हल्के से हल्के झटके की भी सूचना जारी कर रहे हैं। आईएमडी और

Earthquake एप के जरिए यह जानकारी जनता तक पहुंच रही है। पहले ऐसे हल्के झटकों की

रिपोर्टिंग नहीं हो पाती थी। इसका दूसरा पहलू थोड़ा चिंताजनक है।

यह कि Earthquake का केंद्र बदल रहा है। ऐसे में भारतीय इलाकों में भविष्य में भी भूकंप के

बड़े झटके आ सकते हैं। देशभर के भूविज्ञानी इसके अध्ययन में जुटे हुए हैं।

देश में चेतावनी का सिस्टम तैयार

दुनिया में Earthquake की भविष्यवाणी की तकनीक कहीं नहीं है। मगर देश में इसकी चेतावनी का सिस्टम तैयार है।

इसे अर्ली वॉर्निंग सिस्टम कहा जाता है। यह 30 से 40 सेकेंड पहले Earthquake की चेतावनी दे सकता है।

इतने कम समय में जनता तक सूचना दे पाना तो संभव नहीं मगर मेट्रो,

रेलवे, न्यूक्लियर प्लांट आदि के लिए यह तंत्र काफी कारगर है।

इंडियन और यूरेशियन प्लेटें जिम्मेदार

भारत व आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के लिए इंडियन और यूरेशियन टेक्टॉनिक प्लेटों का घर्षण जिम्मेदार है।

जमीन के काफी नीचे सरकती हुई ये प्लेटें आपस में टकराती हैं।

इस घर्षण का असर हिमालय के अलावा अंडमान-निकोबार के क्षेत्र में ज्यादा होता है।

इसलिए उस इलाके को जोन-5 में रखा गया है। दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके जोन-3 में हैं।

 

Share This:
Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

Most Popular

More like this
Related

Arrested: अवैध शराब के साथ दो अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल बरामद

Arrested: अवैध शराब के साथ दो अभियुक्त गिरफ्तार, मोटरसाइकिल...

Inauguration: गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा अब हाईटेक—₹918 लाख के अत्याधुनिक भवनों का लोकार्पण

Inauguration: गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा अब हाईटेक—₹918 लाख के...