Menopause: क्या है इसकी सही उम्र,वक्त से पहले मीनोपॉज का दिल पर पड़ सकता है असर?
Menopause:बढ़ती उम्र में मीनोपॉज एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन यह सही उम्र के पहले हो तो कई
दिक्कतें आ सकती हैं। समय से पहले मीनोपॉज(Menopause) महिलाओं में दिल की बीमारी की भी वजह बन सकता है।
तो फिर इसकी सही उम्र क्या है? पूर्वी यूपी की महिलाओं में आमतौर पर 47 वर्ष के बाद होता है।
यह कहना है बीआरडी मेडिकल कालेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीता सिंह का।
वह शनिवार को मीनोपॉज(Menopause) के कारण और उसके इलाज में दवाओं
के प्रभाव पर आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता मौजूद रहीं।
गुलरिहा स्थित रिजार्ट में सेमिनार का आयोजन हुआ। इसका आयोजन गोरखपुर आब्स एंड गायनी सोसायटी ने किया।
इस दौरान डॉ. रीता सिंह ने बताया कि पर्यावरण में बदलाव का असर महिलाओं की
सेहत पर भी पड़ा है। कुछ महिलाओं में मीनोपॉज 40 से 45 वर्ष में ही हो जा रहा है।
समय से पहले हो रहा मीनोपॉज(Menopause) खतरनाक है। यह कई बीमारियों का संकेत भी है।
समय से पहले मीनोपॉज दिल की बीमारी का संकेत है। मीनोपॉज के कारण शरीर में
हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसी महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का खतरा दूसरी
महिलाओं से अधिक होता है। हार्मोन असंतुलन के कारण हड्डिया कमजोर हो जाती हैं।
समय से हो मीनोपॉज तब भी हो सकती है बीमारी
उन्होंने बताया कि सामान्य अवस्था में भी महिलाओं का मीनोपॉज होने के बाद कुछ साइड इफेक्ट होते हैं।
वह भी हार्मोन संतुलन बिगड़ने के कारण होता है। ऐसे में महिलाओं को घबराहट, बेचैनी, चक्कर, नींद पूरी ना होना,
डिप्रेशन, उदासी, शरीर में कंपन जैसे लक्षण हो जाते हैं। ऐसे में महिलाएं
इसे मानसिक बीमारी मानती हैं। जबकि यह हार्मोन का संतुलन के बिगड़ने से होता है।
जैसे ही मीनोपॉज हो महिला को फौरन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
सेमिनार में गोरखपुर आब्स एंड गायनी सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. अमृता जयपुरियार, डॉ. अरूणा छापड़िया,
डॉ. शालिनी चतुर्वेदी,डॉ. रीता गौतम, डॉ. प्रतिमा पांडेय , डॉ. कल्पना, डॉ. शिखा वर्मा, डॉ अल्पना अग्रवाल, डॉ. रेनू मोहन,
डॉ. एलसी चांडी, डॉ. किरण श्रीवास्तव, डॉ. गीता गुप्ता, डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. बबीता शुक्ला, डॉ. चंदा गुप्ता मौजूद रहीं।
