Economy:तीसरी बड़ी आर्थिकी का आसान लक्ष्य भारत की ओर तेजी से बढ़ रहे वैश्विक कंपनियों के कदम

Date:

spot_img
spot_img

Date:

spot_img
spot_img

Economy:तीसरी बड़ी आर्थिकी का आसान लक्ष्य भारत की ओर तेजी से बढ़ रहे वैश्विक कंपनियों के कदम

Economy:अंतरिम बजट से पहले वित्त मंत्रालय की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जारी विस्तृत रिपोर्ट ‘द इंडियन इकोनमी-ए रिव्यू’ में कहा गया है

कि अगले तीन साल में ही भारतीय अर्थव्यवस्था पांच (ट्रिलियन) लाख करोड़ डालर की हो जाएगी। फिर भारत आर्थिक आकार के लिहाज से अमेरिका एवं चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

- Advertisement -
- Advertisement -

यह भी पढ़ें :Indian Economy: तेजी से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप का अहम रोल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड महामारी और उसके ठीक बाद भू-राजनीतिक उथल-पुथल से जहां दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं दो प्रतिशत की विकास दर हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं,

वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया को चकित करते हुए आगामी वित्त वर्ष 2024-25 में भी सात प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकती है।

रिपोर्ट की मानें तो पिछले एक दशक में सरकार के साहसिक आर्थिक निर्णयों ने देश की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बनाया है।

लिहाजा कृषि से लेकर मैन्यूफैक्चरिंग और डिजिटल सेवा की बदौलत सेवा क्षेत्र में मजबूती आई है। पिछले दिनों चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत की बढ़ती हुई इस आर्थिक और रणनीतिक ताकत की तारीफ करते हुए कहा था

कि भारत तेज आर्थिक विकास के साथ एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और वैश्विक विकास के इंजन के तौर पर स्थापित हुआ है। भारत की ओर वैश्विक कंपनियों के कदम तेजी से बढ़ रहे हैं।

दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसियां भी सहमत हैं कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर तेजी से बढ़ रहा है।

इस समय भारत के पास टिकाऊ विकास के अभूतपूर्व अवसर हैं। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक मंचों पर भारत को विशेष अहमियत मिल रही है।

अमेरिका और रूस, दोनों महाशक्तियों के साथ भारत की मित्रता है। तेजी से बढ़ते बाजार के कारण दुनिया के अधिकांश देशों में भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की ललक दिख रही है। प्रवासी भारतीयों द्वारा वर्ष 2023 में 125 अरब डालर से अधिक धन भारत भेजा गया।

दुनिया में चीन के प्रति बढ़ती नकारात्मकता के मद्देनजर भारत नए वैश्विक आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभरकर सामने आया है।

इसके साथ-साथ दुनिया में मजबूत लोकतंत्र और स्थिर सरकार के रूप में भारत की पहचान बनना, भारत के शेयर बाजार का दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ना,

भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी, देश में उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन, बड़े पैमाने पर पूंजीगत खर्च, गैर जरूरी आयात में कटौती और अर्थव्यवस्था के बाहरी झटकों से उबरने की क्षमता भारत के टिकाऊ विकास की बुनियाद बन सकती है।

भारत द्वारा जी-20 की सफल अध्यक्षता से भी नए आर्थिक लाभ की संभावनाएं बनी हैं, जिससे भारत से निर्यात, भारत में विदेशी निवेश, भारत में विदेशी पर्यटन और भारत के डिजिटल विकास का नया क्षितिज सामने दिखाई देगा।

जी-20 से दुनिया में ग्लोबल सप्लाई चेन में सुदृढ़ता और विश्वसनीयता के मद्देनजर भारत की अहमियत बढ़ेगी। प्राकृतिक संपदा संपन्न अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल कराकर भारत ने अफ्रीकी देशों से नए आर्थिक लाभ की उम्मीदों को बढ़ाया है। इससे अब भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआइ भी तेजी से बढ़ेगा।

ज्ञातव्य है कि वैश्विक स्तर पर गिरावट के रुझान के बीच भारत दुनिया के सर्वाधिक एफडीआइ प्राप्त करने वाले 20 देशों की सूची में आठवें पायदान पर रहा।

इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार भी तेजी से बढ़ता हुए दिखाई दे रहा है। गत दिनों सेंसेक्स 73,000 तक की ऊंचाई पर पहुंच गया था।

अनुमान है कि यह आम चुनाव के पहले 80,000 की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। चुनाव के बाद 2024 के अंत तक 1,00,000 के स्तर पर पहुंच सकता है।

इस साल मैन्यूफैक्चरिंग, विनिर्माण, सीमेंट, इलेक्ट्रिसिटी, होटल, ट्रांसपोर्ट, आटोमोबाइल, फार्मा, केमिकल, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल सेक्टर, ई-कामर्स, बैंकिंग,

मार्केटिंग, डाटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी, आइटी, टूरिज्म, रिटेल ट्रेड, हास्पिटैलिटी आदि सेक्टर भी बेहतर करते हुए दिखाई देंगे। आज भारत विश्व का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है।

यद्यपि दुनियाभर में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली आकर्षक अर्थव्यवस्था वाले देश के रूप में रेखांकित हो रहा है, लेकिन फिर भी इसे कई आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।

इन दिनों देश के सामने डालर की तुलना में रुपये के गिरते हुए मूल्य की चुनौती है। भारत को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की उस चेतावनी पर भी ध्यान देना होगा, जिसमें कहा गया है

कि भारत में केंद्र और राज्यों का सामान्य सरकारी कर्ज जीडीपी के 100 प्रतिशत के पार पहुंच सकता है।

भारत के रणनीतिकारों को प्रतिकूल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रक्षात्मक रणनीति बनाने के लिए भी तैयार रहना होगा।

इसके साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ाने होंगे। हमें 2030 तक सात (ट्रिलियन) लाख करोड़ डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सालाना सात प्रतिशत विकास दर की जरूरत होगी।

यह भी पढ़ें :Global Economy: मेरे तीसरे कार्यकाल में तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा भारत, पीएम मोदी ने क‍िया ऐलान

दुनिया में जो देश गहन संकट से बाहर निकल विकसित और शक्तिशाली बने हैं, उनकी सफलता में अन्य चीजों के साथ उनके राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण भी अहम रहा है।

ऐसे में भारत को भी अब विकसित देश बनने के लिए अपने मूल्यों, संस्कृतियों और अपने नायकों की वीरता की सराहना के साथ विविधता के बीच एकजुटता बढ़ानी होगी और प्रवासी भारतीयों में भी जुड़ाव की भावना पैदा करनी होगी।

इससे देश विकास के ऊंचे लक्ष्य और आम आदमी की खुशहाली के साथ टिकाऊ विकास तथा वैश्विक विकास का केंद्र बनने के अवसर का लाभ उठाते हुए दिखाई दे सकेगा।

(लेखक एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, इंदौर के निदेशक हैं)

Share This:
Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

Most Popular

More like this
Related

Kushinagar Airport: विधायक पी.एन. पाठक ने कुशीनगर एयरपोर्ट से उड़ान शुरू कराने की उठाई मांग

Kushinagar Airport: विधायक पी.एन. पाठक ने कुशीनगर एयरपोर्ट से...

Board Exam: डीएम-एसपी का औचक निरीक्षण,नकलविहीन परीक्षा कराने के सख्त निर्देश

Board Exam: डीएम-एसपी का औचक निरीक्षण,नकलविहीन परीक्षा कराने के...

Procession: महाशिवरात्रि पर भव्य शिव बारात शोभायात्रा, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

Procession: महाशिवरात्रि पर भव्य शिव बारात शोभायात्रा, श्रद्धालुओं का...