THSC: तेज़ बारिश और तूफ़ान के बीच हर्षिल घाटी में नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण की शुरुआत
उत्तरकाशी (हर्षिल घाटी): लगातार हो रही तेज़ बारिश, ठंडी हवाओं और पहाड़ी तूफ़ान के बावजूद हर्षिल घाटी में नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल शुभारंभ हुआ। दुर्गम मौसम के बीच आयोजित यह पहल क्षेत्र में पहली बार इस स्तर पर संचालित की गई, जिसे एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।
बगोरी गांव के पंचायती भवन में आयोजित इस प्रशिक्षण में हर्षिल, झाला, धराली, गंगोत्री और मुखवा सहित सीमांत क्षेत्रों से 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। खराब मौसम के बावजूद कई प्रतिभागी बाइक से कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, जो उनके उत्साह और समर्पण को दर्शाता है।
कार्यक्रम में बगोरी की ग्राम प्रधान रंजीता धौबरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत हर्षिल घाटी नए अवसरों का केंद्र बन रही है और ऐसे प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रहे हैं।
हर्षिल की ग्राम प्रधान सुचित्रा रौतेला ने कहा कि इस तरह की पहल से स्थानीय युवाओं को सही दिशा मिल रही है और वे पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।
वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत इस क्षेत्र की संभावनाओं पर जोर
उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के छुपे हुए नेचर ट्रेल्स की पहचान कर उन्हें पर्यटन से जोड़ना इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। साथ ही उन्होंने ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत इस क्षेत्र की संभावनाओं पर जोर दिया।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर्षिल दौरे के दौरान भी इस क्षेत्र को ‘वाइब्रेंट विलेज’ के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया था। इसी दिशा में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यह प्रशिक्षण उत्तराखंड पर्यटन विभाग, उत्तराखंड सरकार और पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, जबकि समर्पित मीडिया सोसाइटी इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभा रही है।
कठिन मौसम में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसरों की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।
