Ashtami fast: 9 अगस्त को पड़ रहा है यह खास व्रत, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर, कुंभ के लिए खास
Ashtami fast: इस साल बुध अष्टमी व्रत 9 अगस्त को पड़ रहा है। आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार बुध अष्टमी का
व्रत करने से मनुष्य के सभी प्रकार के पापों का शमन हो जाता है।
हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार जो भी मनुष्य बुध अष्टमी का व्रत करता है,
वह सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। हर महीने में दो अष्टमी व्रत होते हैं,
महीने की दो अष्टमी में जो अष्टमी बुधवार को हो, तो उसे बुध अष्टमी कहा जाता है।
बुध अष्टमी के दिन बुध और सूर्य की विशेष पूजा अर्चना किया जाता है ।
जिन लोगों की जन्म कुंडली में बुध कमजोर है या बुध से संबंधित किसी प्रकार का कोई दोष है,
उन लोगो को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। इस व्रत को करने से बुध भी मजबूत होता है ,
साथ ही साथ सूर्य का भी शुभ प्रभाव प्राप्त होता है। जन्म कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने से
बुधादित्य नामक राजयोग बनता है। जो व्यक्ति के कुंडली और जीवन में बड़ा महत्वपूर्ण योग होता है ।
इससे व्यक्ति के जीवन में यश कीर्ति की वृद्धि होती है। विशेष करके जिन लोगों की कुंडली में बुध कारक स्थिति में
विद्यमान है उनके लिए विशेष तौर पर लाभदायक होगा। जैसे वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु,
मकर, कुंभ, मीन लग्न के लोगों को विशेष तौर पर यह व्रत लाभ पहुंचाता है ।
बुध अष्टमी व्रत का लाभ
जो भी व्यक्ति पूरे मनोयोग के साथ पूरे विधि विधान के साथ बुध अष्टमी का व्रत करता है।
उसके सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस व्रत को करने से धन-धान्य पुत्र ऐश्वर्य वैभव सुख संपन्नता की प्राप्ति होती है।
व्यक्ति की में बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। स्वास्थ्य में सुधार होता है और हड्डियों के रोग से मुक्ति मिलती है।
बुध ग्रह को मैनेजमेंट का कारक ग्रह माना जाता है। इस कारण से
व्यापार में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्ति के निर्णय क्षमता में भी सुधार होता है।
इस व्रत के विधि विधान इस प्रकार है :-
इस दिन सर्वप्रथम दैनिक कार्य से निवृत होने के बाद गंगा जल मिश्रित जल में स्नान कर लेना चाहिए ।
पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लेनी चाहिए और फिर गंगाजल से भरे कलश को पूजा घर में स्थापित कर देना चाहिए।
व्रत का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश, माता पार्वती, सहित सभी
देवी देवताओं का स्तुति एवं प्रार्थना करना चाहिए, ध्यान करना चाहिए ।
उसके बाद बुध ग्रह की विशेष पूजा अर्चना करनी चाहिए ।
इसके लिए गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ कर लेना भी विशेष लाभदायक माना जाता है।
बुध अष्टमी के दिन भगवान को आठ प्रकार के पकवानों का भोग लगाते हुए
इसे बांस के पत्तों पर रखकर भगवान को अर्पित करना चाहिए ।
इस दिन मूंग की दाल की पंजीरी और हलवा भोग के रूप में सायंकाल में जरूर वितरित करना चाहिए ।
इस भोग को फल, फूल, धूप, दीप आदि के साथ बुध ग्रह को अर्पित करना चाहिए।
उसके बाद बुध ग्रह के मंत्रों का जप करना चाहिए और गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करना चाहिए।
पूजा खत्म होने के पश्चात चढ़ाए गए प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांट देना चाहिए।
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती की विशेष तौर पर पूजा आराधना करनी चाहिए।
बुध ग्रह से संबंधित निम्न में से किसी मंत्रों का जप करना चाहिए:-
ॐ बुं बुधाय नमः
ॐ सुबुद्धिप्रदाय नमः
ॐ सौम्य ग्रहाय नमः
ॐ सर्व सौख्या प्रदाय नमः
अगर किसी कारण व्रत नहीं कर सकते और आपकी जन्मकुंडली में बुध ग्रह से संबंधित किसी
प्रकार का कोई दोष है। उसके लिए इस दिन मंदिर जाकर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना चाहिए।
क्योंकि भगवान गणेश को मोदक अति प्रिय है। इससे भी बुध ग्रह का नकारात्मक प्रभाव समाप्त होता है।
बुधवार के दिन भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करें। बुधवार के दिन स्नान आज से निवृत्त होकर
मंदिर जाकर भगवान श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाएं। भगवान गणेश को 11, 21 अथवा 108 गांठ दूर्वा का चढ़ाते हैं
तो बहुत जल्दी शुभ फलों की प्राप्ति हो जाती है। बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं ।
