Supreme Court: लड़की मांगलिक है या नहीं…HC के कुंडली जांचने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

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Supreme Court: लड़की मांगलिक है या नहीं…HC के कुंडली जांचने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Supreme Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा रेप पीड़िता की कुंडली जांचने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटो संज्ञान लिया है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाईकोर्ट के कुंडली जांचने वाले आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही वैकेशन बेंच ने इस पर सुनवाई करने को कहा है।

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कुंडली जांचने का आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह रेप के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यलय के प्रोफसर गोविंद राय उर्फ मोनू की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।

बतादें कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष को आदेश दिया है कि 10 दिन के भीतर पीड़िता की कुंडली की जांच करके

बताएं कि पीड़िता मांगलिक है या नहीं। कोर्ट ने पीड़िता की कुंडली की जांच के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है।

जेल में बंद हैं रेप के आरोपी प्रोफेसर

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोविंद राय रेप के आरोप में जेल में बंद हैं। आरोपी ने अपनी जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि पीड़िता मांगलिक है इसलिए याची उससे शादी नहीं कर सकता।

दूसरी ओर पीड़िता के अधिवक्ता विवेक कुमार सिंह ने कहा कि पीड़िता मांगलिक नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पीड़िता मांगलिक है या नहीं यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

कोर्ट ने लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष को पीड़िता की कुंडली दोष देखने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने पीड़िता की कुंडली की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगी है।

ये है पूरा मामला

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दुराचार के एक मामले में जेल में बंद अभियुक्त की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के

विभागाध्यक्ष को आदेश दिया है कि वह मामले की पीड़िता की कुंडली को देखकर रिपेार्ट दें कि वह मांगलिक है अथवा नहीं।

न्यायालय ने सभी पक्षों को दस दिनों के भीतर पीड़िता की कुंडली विभागाध्यक्ष को सौंपने का आदेश दिया है। न्यायालय ने विभागाध्यक्ष से 26 जून तक कुंडली की

रिपेार्ट सील बंद लिफाफे में तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने अभियुक्त गोविंद राय उर्फ मोनू की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर

सुनवाई करते हुए पारित किया। घटना की रिपेार्ट चिनहट थाने पर दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया है कि अभियुक्त ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर

बहला-फुसला कर उसके साथ दुराचार किया और बाद में शादी से मुकर गया है। अभियुक्त की ओर से दलील दी गई

कि पीड़िता मांगलिक है इसी कारण से अभियुक्त का उसके साथ विवाह नहीं हो सकता है।

वहीं पीड़िता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि वह मांगलिक नहीं है।

लगभग छह महीने से विचाराधीन उक्त जमानत याचिका जब न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की पीठ में सुनवाई के लिए पेश हुई तो यह बात सामने आई

कि अभियुक्त पीड़िता के मांगलिक होने की शंका में उस से विवाह नहीं कर रहा है जबकि पीड़िता की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि वह मांगलिक नहीं है।

इस पर न्यायालय लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग की मदद लेने का फैसला लिया और इसी वजह से

विभागाध्यक्ष को पीड़िता की कुंडली का अध्यन कर सही स्थिति बताने को कहा है।

 

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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