Electricity: के उत्तर प्रदेश 19 जिलों में 74 लाख बिजली उपभोक्ताओं के घर लगेंगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर,पढ़ें क्या है पूरा प्लान…
Electricity:बिजली विभाग ने बिलिंग से होेने वाले घाटे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए नए प्रयास तेज कर दिए हैं।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों के प्रत्येक उपभोक्ता के यहां
प्रीपेड स्मार्ट मीटर चरणबद्ध तरीके से लगाए जाएंगे। राजधानी में करीब दस लाख
और अन्य जिलों 64 लाख उपभोक्ता के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है।कुल 74 लाख लगने हैं।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने इसके लिए टेंडर की प्रकिया पूरी करने जा रहा है।
नवंबर से लगेंगे प्रीपेड मीटरः नवंबर में मीटर लगाने की योजना जमीन पर दिखने लगेगी।
निदेशक (वाणिज्य) योगेश कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था के बाद उपभोक्ताओं को मोबाइल की तर्ज पर
पहले मीटर रीचार्ज कराना होगा और फिर बिजली का उपभोग उपभोक्ता कर पाएगा।
इस नई शुरुआत के बाद हर जिले में मीटर बिलिंग से आने वाला राजस्व बेहतर हो जाएगा
और मीटर रीडरों की जरूरत भी आने वाले समय में नहीं पड़ेगी। सिर्फ बिजली विभाग को लाइन लास रोकने के लिए
ऐसे उपभोक्ताओं पर नजर रखनी होगी जो बाईपास व कटिया लगाकर बिजली चोरी कर रहे हो।
ऐसे में प्रीपेड उपभोक्ताओं के मीटरों की समय-समय पर जांच करना जरूरी होगा।
जांच करने के लिए अभियंताओं व बिजली कर्मियों की टीम को रैंडम चेकिंग अभियान अपने-अपने क्षेत्रों में चलाना होगा,
जिससे बिजली चोरी पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने बताया कि अभी बकायेदार का कनेक्शन काटने के लिए
टीम भेजनी पड़ती है, लेकिन प्रीपेड मीटर में पैसा खत्म होने से पहले ही उपभोक्ता के
मोबाइल पर मैसेज आ जाएगा और वह अपने मीटर को रीचार्ज करा सकेगा।
इस नई व्यवस्था से बिजली खर्च करने से पहले पैसा बिजली विभाग के पास आ जाएगा।
बिजली चोरी वाले क्षेत्रों में यह व्यवस्था पहले की जाएगी। अभियंताओं ने बताया कि पुराने लखनऊ के ठाकुरगंज,
चौक, रेजीडेंसी, ऐशबाग, सेस द्वितीय, विश्वविद्यालय जैसे खंडों में अभियान चलाकर लक्ष्य को पूरा किया जा सकेगा।
स्वीकृत लोड से अधिक इस्तेमाल किया तो कट जाएगी बिजलीः उपभोक्ता ने जितने किलोवाट का लोड लिया होगा,
उतने का ही उपभोग कर सकेगा। उदाहरण के तौर पर अगर तीन किलोवाट का कनेक्शन है
तो उससे ऊपर इस्तेमाल जैसे ही करेगा प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बिजली की सप्लाई बंद हो जाएगी। लोड कम होने के बाद ही
बिजली चालू हो सकेगी। इस व्यवस्था से क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर जो अभी ओवरलोड होने के कारण जल जाते हैं, वह नहीं होगा।
