Insurance:कंपनियों और जीएसटी अथॉरिटी के बीच जारी लंबी कानूनी लड़ाई के बीच इंश्योरेंस कंपनियों को मिलेगी 20 हजार करोड़ रुपये की राहत?
Insurance: इंश्योरेंस कंपनियों को जीएसटी से जुड़े मामलों में 20 हजार करोड़ रुपये की बड़ी राहत मिली है.
इसके साथ ही कंपनियों और जीएसटी अथॉरिटी के बीच जारी लंबी कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई है.
सीएनबीसी टीवी 18 को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 53 वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जिन स्पष्टीकरण को मंजूरी दी गई,
उनके नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही 20 हजार करोड़ रुपये के नोटिस कानूनी रूप से रद्द हो गए हैं.
सूत्र ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने को-इंश्योरेंस, री-इंश्योरेंस आदि के मामले में इंश्योरेंस (Insurance) कंपनियों के पक्ष को सुना और उनके पक्ष में फैसला लिया.
वहीं डीजीजीआई (Directorate General of GST intelligence) ने इससे जुड़े मामलों में देश में काम कर रही इंश्योरेंस (Insurance) कंपनियों को करीब 100 नोटिस भेजे थे अब ये नोटिस अब रद्द हो गए हैं.
क्या मिली राहत
इंश्योरेंस (Insurance) सेक्टर को डीजीजीआई की तरफ से नवंबर 2022 से नोटिस मिल रहे थे.
ये नोटिस को-इंश्योरेंस (Insurance) एग्रीमेंट, रीइंश्योरेंस कमीशन और क्रॉप स्कीम रीइंश्योरेंस से जुड़े थे.
इन नोटिस में कहा गया था कंपनियों ने जीएसटी का भुगतान नहीं किया और उनसे टैक्स की डिमांड की गई थी.
इंश्योरेंस कंपनियों को मिले इन नोटिस में कुल मिलाकर 20000 करोड़ की टैक्स देनदारी तय की गई थी.
इस मामले जीएसटी नियमों को लेकर तस्वीर साफ नहीं थी इस वजह से सेक्टर ने ये पूरा मामला सरकार के सामने उठाया.
सेक्टर का पक्ष सुनने के बाद, जीएसटी काउंसिल के तहत लॉ कमेटी और फिटमेंट कमेटी ने अपनी सिफारिशें सामने रखीं.
22 जून को 53वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और अगले कुछ दिनों में इसे लेकर नोटिफिकेशन जारी किया गया.
क्या है एक्सपर्ट्स की राय
EY टैक्स पाटर्नर सौरभ अग्रवाल के मुताबिक इतनी बड़ी टैक्स डिमांड को खत्म करने से भारत में इंश्योरेंस (Insurance) कारोबार में और पारदर्शिता आएगी साथ ही इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कारोबार में आसानी बढ़ेगी.
उनके मुताबिक फिलहाल ये देखना है कि इंश्योरेंस कंपनियों के द्वारा इन नोटिस पर पहले से ही चुका दी गई रकम का रिफंड कैसे होता है.
उनके मुताबिक जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों ने सेक्टर के लिए बेहद जरूरी राहत दी है.
को- इंश्योरेंस (Insurance) प्रीमियम और रीइंश्योरेंस कमीशन को No Supply मानना और क्रॉप-स्कीम के रीइंश्योरेंस को निश्चित अवधि तक छूट देना सेक्टर की चिंताओं को हल करने का एक बेहतर तरीका है.
