tax से भरी सरकार की झोली, अब वित्त मंत्री जी आपकी बारी, क्या बजट में मिलेगी खुशखबरी?

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tax से भरी सरकार की झोली, अब वित्त मंत्री जी आपकी बारी, क्या बजट में मिलेगी खुशखबरी?

tax:इनकम टैक्, जीएसटी, नेट टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी हुई है. टैक्स से सरकार का खजाना बढ़ा है. सरकार के मोर्चे पर लोगों ने सरकार का साथ दिया अब लोगों की बजट से उम्मीदें हैं.

हालांकि ये अंतरिम बजट है, लेकिन लोगों को उम्मीदें है कि सरकार उन्हें कुछ राहत दे सकती है . लोकसभा चुनाव से पहले आने वाले इस बजट को लेकर लोगों के कई उम्मीदें लगा रखी है.

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इनकम टैक्स इनकम टैक्स और जीएसटी मासिक कलेक्शन बढ़ने से उम्मीद की जा रही है कि सरकार कुछ राहत दे सकती है. यह अनुमान जताया जा रहा है कि जीएसटी मासिक संग्रह बढ़ने से सरकार अंतरिम बजट में राजकोषीय सूझबूझ पर चलते हुए भी किसानों और सामाजिक योजनाओं के लिए अधिक धन आवंटित करने की स्थिति में रहेगी.

सूत्रों ने यह अनुमान जताया है. सरकार आम चुनाव में जाने के पहले एक फरवरी को अपना अंतरिम बजट पेश करेगी. ऐसे में इस बजट में समाज के गरीब वर्गों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है.

सूत्रों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में आय और कॉरपोरेट कर संग्रह में उछाल दिख रहा है. इससे कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट अनुमान से लगभग एक लाख करोड़ रुपये अधिक रह सकता है. सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए प्रत्यक्ष करों से 18.23 लाख करोड़ रुपये जुटाने का बजट लक्ष्य रखा था.

इस मद में 10 जनवरी, 2024 तक कर संग्रह 14.70 लाख करोड़ रुपये हो चुका था, जो बजट अनुमान का 81 प्रतिशत है. अभी वित्त वर्ष पूरा होने में लगभग ढाई महीने का वक्त बाकी है.

वहीं जीएसटी के मोर्चे पर केंद्रीय जीएसटी राजस्व 8.1 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से लगभग 10,000 करोड़ रुपये अधिक होने की उम्मीद है. हालांकि उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क संग्रह में करीब 49,000 करोड़ रुपये की कमी की आशंका है.

केंद्र का सकल कर राजस्व 33.6 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से 60,000 करोड़ रुपये अधिक होने की उम्मीद है. रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपनी बजट आकलन रिपोर्ट में कहा था कि अगले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर एवं जीएसटी संग्रह के कारण सकल कर राजस्व 11 प्रतिशत बढ़ेगा

लेकिन उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क संग्रह में वृद्धि कम रह सकती है. इक्रा रेटिंग्स के मुताबिक, “वर्तमान मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 9.5 प्रतिशत वृद्धि के पूर्वानुमान के साथ वित्त वर्ष 2024-25 में कर उछाल 1.2 रह सकती है. चालू वित्त वर्ष में इसके 1.4 रहने का अनुमान है.

कर संग्रह बढ़ने से सरकार राजकोषीय सशक्तीकरण मार्ग से हटे बगैर मनरेगा, ग्रामीण सड़क, पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी सामाजिक योजनाओं के लिए अधिक धन आवंटित कर पाने की स्थिति में रहेगी.

चालू वित्त वर्ष में सरकारी प्राप्तियों और व्यय के बीच का अंतर यानी राजकोषीय घाटा जीडीपी का 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

राजकोषीय घाटे को 2025-26 तक 4.5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. डेलॉयट इंडिया में साझेदार संजय कुमार ने कहा कि फिलहाल सरकार के पास कुछ निश्चित राजकोषीय गुंजाइश है और वे अंतरिम बजट में उसे खर्च करना चाहेंगे.

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कुमार ने कहा, ”2024-25 के अंतरिम बजट में बुनियादी ढांचे, महिला केंद्रित योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ने की उम्मीद है.

चालू वर्ष के लिए सरकार के बजट का आकार 40 लाख करोड़ रुपये था और अगले वित्त वर्ष में इसके 10 प्रतिशत बढ़कर 43-44 लाख करोड़ रुपये हो जाने की संभावना है.

 

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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