Bihar को मिलेगा विशेष राज्य का दर्जा? नीतीश कुमार ने अमित शाह के समक्ष उठाई मांग

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Bihar को मिलेगा विशेष राज्य का दर्जा? नीतीश कुमार ने अमित शाह के समक्ष उठाई मांग

Bihar: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक बिहार की राजधानी पटना में रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित

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संवाद कक्ष में संपन्न हुई। दोपहर 2 बजे से शुरू हुई बैठक करीब 3 घंटे तक चली।

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अमित शाह के समक्ष बिहार को

विशेष दर्जे की मांग उठायी। इस बीच राज्य के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग तो बहुत पुरानी है और यह हमारी प्रमुख मांग भी है।

विशेष राज्य का दर्जा मतलब क्या होता है?

समग्र विकास के मद्देनजर कुछ राज्यों को केंद्र विशेष श्रेणी में रखती है।

इसलिए उन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्य कहा जाता है।

भारत के संविधान में विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रावधान नहीं है।

पहली बार साल 1969 में पांचवें वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने असम, नगालैंड और

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया था। 3 राज्यों को विशेष राज्य की श्रेणी में रखने के बाद

कई राज्यों ने इसकी मांग शुरू कर दी। केंद्र ने इसके बाद एक फॉर्मूला बनाया और

इसी पर खरे उतरने वाले राज्यों को इसका दर्जा दिया गया। वर्तमान में 11 राज्यों को

विशेष राज्य की श्रेणी में रखा गया है। इनमें पूर्वोत्तर के सभी राज्य शामिल हैं।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड और हिमाचल को भी विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है।

बिहार को क्यों नहीं मिल रहा है विशेष राज्य का दर्जा?

आजादी के 75 साल बाद भी बिहार की एक बड़ी आबादी गरीबी से जूझ रही है।

बिहार सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 94 लाख परिवारों की आय 6 हजार से भी कम है।

यह कुल आबादी का 34 प्रतिशत है। बिहार के अधिकांश लोग या तो बेरोजगार हैं

या दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। इतना ही नहीं,

बिहार की सीमा से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा भी लगती है। अब सवाल उठता है

कि आखिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा केंद्र क्यों नहीं दे रहा है?

अर्थशास्त्री वाई.वी रेड्डी की अध्यक्षता वाली 14वें वित्त आयोग ने विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर

केंद्र सरकार को एक सिफारिश सौंपी थी। इस सिफारिश में कहा गया था

कि उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों को छोड़कर किसी अन्य राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा न दिया जाए।

आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा कि दर्जा देने की बजाय पिछड़े राज्यों को विशेष सहायता पैकेज दिया जाए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मुताबिक प्रधानमंत्री ने अपने वादे अनुरूप बिहार के विकास के लिए

1.35 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह पैसे महामार्ग, ग्रामीण सड़कें, रेलवे और एयरपोर्ट के मद में खर्च किए गए।

2018 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया था कि अब किसी भी

राज्य को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाएगा। इसके बदले राज्य विशेष पैकेज की मांग कर सकता है।

 

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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