Monsoon: मानसून के ‘देसी अलार्म’…आपने देखे-सुने हैं क्या? ये पेड़ और जानवर बताते हैं कब होगी बारिश 

Date:

spot_img
spot_img

Date:

spot_img
spot_img

Monsoon: मानसून के ‘देसी अलार्म’…आपने देखे-सुने हैं क्या? ये पेड़ और जानवर बताते हैं कब होगी बारिश

monsoon: मानसून जमकर तन-मन को भिगो रहा हैं। लोग मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट लगातार चेक कर रहे हैं।

आईएमडी का ट्विटर हैंडल है, टीवी पर वेदर अपडेट टेलीकास्ट हो रहे हैं

- Advertisement -
- Advertisement -

और वेबसाइट और खबरों में भी मौसम से जुड़ी खबरें प्रमुखता से बताई जा रही हैं।

मगर क्या आपने कभी सोचा है जब ये सब नहीं था, तब मौसम का अंदाजा लोग कैसे लगाते थे?

इन सबसे पहले भी मौसम के बारे में भविष्यवाणियां होती थीं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बगैर सेटेलाइट और अत्याधुनिक यंत्रों के बुजुर्ग जानकार मौसम को लेकर भविष्यवाणी करते थे,

जोकि बिल्कुल सटीक भी होती थीं। किस आधार पर होती थीं वो भविष्यवाणियां औऱ कितनी सच होती थीं,

मानसून (monsoon) के ये अलार्म किस तरह संकेत देते थे कि लोग अलर्ट हो जाते थे, आप भी जान लीजिए।

असल में हमारे पूर्वजों ने अपने अनुभव के आधार पर अपने आसपास की चीजों को मौसम से जोड़ दिया।

वह इन्हीं चीजों को देखकर बता देते हैं कि मौसम कैसा रहेगा।

जानवरों का व्यवहार पेड़ों की पत्ती और पक्षियों की आवाज भी आने वाले मौसम के बारे में बताते हैं।

कहा जाता है कि आसमान पर बादल हो या न हो, अगर बटेर बोल रहा तो समझिए की आज ही बरसात होगी।

ग्रामीण इलाकों में लोग बरसात से बचने के इंतजाम में जुड़ जाते हैं।

ठीक इसी तरह से सांप को भी मानसून सूचक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

सांप अगर जमीन पर चलने के बजाय पेड़ों पर चढ़कर बैठने लगे

तो यह माना जाता है कि आने वाले वक्त में पानी बरसने वाला है।

हमारे पूर्वजों का मानना था कि अगर गोरैया मिट्टी में अठखेलियां करे

तो समझिए कि आने वाला मौसम भरपूर होगा। ठीक इसी तरह मेंढक अगर बारिश से पहले ही टर्र-टर्र करने लगे,

तो यह मानसून के लिए शुभ संकेत होता है। ऐसा बारिश होने से कुछ वक्त पहले ही होता है।

कुछ लोग मोर को देखकर भी मानसून की भविष्यवाणी करते हैं। बुजुर्गों का मानना है

कि खेत में मोर लगातार पीक कर रहा हो पंख फैला रहा है, इसका

सीधा सा मतलब है कि अगले 4 से 6 दिनों के अंदर जोरदार बारिश होगी।

आदिवासियों की मानसून (monsoon) भविष्यवाणी गिरगिट पर भी टिकी होती हैं।

अगर कहीं के लिए यात्रा शुरू कर रहे हैं और सामने गिरगिट पेड़ पर चढ़ता दिख जाए तो यात्रा स्थगित कर देते हैं।

उनका मानना होता है कि इससे जोरदार बारिश होगी। पीपल धार्मिक पेड़ है।

लोग पूजा पाठ के लिए वर्षों से इस पेड़ के पास जाते हैं। गर्मियों में जब तमाम पेड़ों के पत्ते खत्म होते हैं,

तब इसमें नई पत्तियां होती हैं। यही पत्तियां ज्यादा हरी हों तो गांव के लोग बता देते हैं

कि इस बारिश अधिक होगी। इसी तरह महुआ के पेड़ को देखकर

अनुमान लगाया जाता है कि कम पत्ते कम बारिश, ज्यादा पत्ते ज्यादा बारिश होगी।

बबूल का पेड़ घना-बांस की पत्तियां हरी हों, तो संकेत खराब

बबूल की एक प्रजाति खिजरा होती है। आम बबूल के मुकाबले यह ज्यादा घना होता है

लेकिन अगर यह ज्यादा हरा-भरा हो जाए, इतना घना हो जाए कि शाखाएं जमीन पर लगने लगें तो बुजुर्ग मानते हैं

कि इस बार मानसून अच्छा नहीं होगा। ठीक इसी तरह बांस को लेकर माना जाता है।

गर्मी में बांस एकदम सूखा रहता है। लेकिन, अगर बांस गर्मी में भी हरा-भरा नजर आए,

तो सूखा पड़ने की संभावनाओं पर बात होने लगती है। घरों के बाहर अक्सर नीम के पेड़ होते हैं।

बिना बरसात अगर यह ज्यादा हरी-भरी दिखाई दे, इसमें आवश्यकता से

अधिक निंबोरी लदी नजर आएं, तो माना जाता है कि इस बार बारिश कम होगी।

कौए का रात और सियार का दिन में रोना बुरा

कौआ आमतौर पर दिन में ही बोलता है। रात में यह अपने घोसलों में चले जाते हैं।

लेकिन अगर यह रात में भी कांव-कांव कर रहे हैं तो समझिए इस बार सूखा पड़ने वाला है।

ठीक इसके उल्टा अगर जून के महीने में सियार दिन में रोता है तो अपशकुन माना जाता है।

बुजुर्ग मानते हैं कि ऐसा होना आने वाले मानसून के लिए अच्छा संकेत नहीं होता है।

मौसम के इन देसी अलार्म पर बुजुर्ग आज भी टीवी-मोबाइल पर बताए गए मौसम से ज्यादा भरोसा करते हैं।

घाघ-भड्डरी की बारिश को लेकर कहावतें

अकबर के समय में महाकवि घाघ उन कवियों में शामिल थे जो पेड़-पक्षियों के अंदर हुए बदलाव को देखकर बता देते थे

कि मानसून कैसा होगा। घाघ-भड्डरी ने बारिश को लेकर जो कहावतें उनको आप भी देखिए।

घाघ कवि ने वर्षा कब नहीं होती इस संबंध में कहा है-

दिन का बद्दर रात निबद्दर, बहै पुरवैया भव्बर भव्बर।।

घाघ कहैं कुछ होनी होई। कुवा के पानी धोबी धोई।।

वर्षा न होने का संकेत घाघ कवि वैज्ञानिक दृष्टि से देते हैं। जैसे-

दिन में गर्मी रात में ओस, कहें घाघ बरखा सौ कोस।

अगर हवा दक्षिणी अर्थात दक्षिण पश्चिम की हो और पूर्व की ओर बादलों को न ले जावे तो वर्षा न होगी क्योंकि पूर्व की

ओर जाना तभी होता है जब वह हिमशृंग (पर्वत की चोटी) से टकराकर बरस जावे। तब कहा-

सब दिन बरसो दखिना बाय, कभी न बरसो बरसा पाय।

वर्षा के प्रधान नक्षत्रों में आद्रा, कृतिका में कुछ वर्षा होनी चाहिए,

नहीं तो अकाल की संभावना बनेगी, ऐसी भड्डरी का कहना है-

कृतिका तो कोरी गई आद्रा मेंह न बूँद।

तो यौं जानौ भड्डरी काल मचावै दंद।।

ये हैं अच्छी वर्षा के संकेत

-आकाश में सारस का झुंड गोलाकार परावलय बनाकर उड़ता दिखे, तो शीघ्र वर्षा।

-पेड़ों पर दीमक तेजी से घर बनाने लगें तो इसे अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है।

-मोरों का नाचना, मेंढक का टर्राना, उल्लू का चीखना वर्षा का संकेत माना जाता है।

-बकरियां अपने कानों को जोर-जोर से फड़फड़ाने लगें, तो यह शीघ्र वर्षा का सूचक।

-भेड़ें अगर अचानक समूह में इकट्ठी होकर चुपचाप खड़ी हो जाएं, तो भारी बारिश।

-यदि इल्लियां तेजी से अपने लिए छिपने की जगह ढूंढने लगें, तो पानी पड़ने का संकेत।

-शाम ढलते में लोमड़ी की आवाज दर्द से चीखने जैसी आए, तो यह बारिश का आसार।

-चिडि़या ने घोंसला पर्याप्त उंचाई पर बनाया हो, तो इसे अच्छी वर्षा का प्रतीक होता है।

-यदि घोंसला नीचा है, तो वर्षा की अनुमान भी सामान्य से कम होने का लगाया जाता है।

-गोल्डन शावर नाम के पेड़ में फूल आने के 45 दिन के अंदर बारिश शुरू हो जाती है।

-नीम का पेड़ फूलों से भर जाए, तो इसे बहुत अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है।

Share This:
Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

Most Popular

More like this
Related