SBI की आर्थिक रिपोर्ट से सामने आई जानकारी,खुदरा महंगाई दर बढ़ने के पीछे कौन सी वजहें हैं जिम्मेदार
सितंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले पांच महीनों के उच्चतम स्तर 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गइ है।
एसबीआइ (SBI) की आर्थिक रिपोर्ट इकोरैप में महंगाई के नए तेवर के लिए बेमौसम बारिश को दोष दिया गया है।
इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से 700 प्रतिशत तक बेमौसम बरसात हुई है।
आने वाले महीनों में कई राज्यों में अनाज और फल-सब्जियों के उत्पादन पर इसका असर दिखेगा।
साल 2019 का दिया हवाला
एक उदाहरण वर्ष 2019 का दिया गया है जब मौजूदा साल के मुकाबले बहुत ही कम बरसात हुई थी
लेकिन इसकी वजह से चार महीनों के भीतर खाद्य उत्पादों में महंगाई की दर में चार प्रतिशत का इजाफा हो गया था।
मार्च, 2020 तक सब्जियों की कीमतें तो कम हो गई थीं लेकिन मोटे अनाजों पर
इसका असर बाद में भी देखने को मिला था। सितंबर में खाद्य उत्पादों में
महंगाई की दर 8.4 प्रतिशत रही है जो पिछले 22 महीनों का सर्वाधिक है।
कर्ज महंगा होने का सिलसिला रहेगा जारी
इन हालातों में एसबीआइ (SBI) ने कहा है कि फरवरी तक रेपो रेट 6.50 प्रतिशत तक हो सकती है।
कई एजेंसियों ने कहा है कि महंगाई के नए आंकड़ों को देखते हुए आरबीआइ के लिए
वर्ष 2022-23 के लिए महंगाई दर के लक्ष्य को 6.7 प्रतिशत से ज्यादा करना होगा।
रेपो रेट की मौजूदा दर अगले कुछ महीनों में 6.5 प्रतिशत तक जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
महंगाई को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि कर्ज के महंगा रहने का सिलसिला अभी जारी रहेगा।
