motorcycle accident payouts:सड़क दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति को कौन देगा मुआवजा?
Motorcycle accident payouts: बीमा कंपनियां चाहती हैं
कि वाहन मालिक को अतिरिक्त थर्ड पार्टी कवर खरीदना चाहिए.जो इस तरह का कवर नहीं खरीदते हैं
उन पर कड़ा जुर्माना लगना चाहिए. हो सकता है कि इस बात पर सभी सहमत न हों
बहुत से लोग ट्रक कर्ज लेकर रोजगार करने के लिए खरीदते हैं.
ऐसे लोगों को मामूली मुआवजा देने में भी दिक्कत आ सकती है.
क्या किसी दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित को दिए जाने वाले मुआवजे में वाहन मालिकों का भी योगदान होना चाहिए.
ईटी वेल्थ ने इस बारे में कई विशेषज्ञों से बात की. आइये जानते हैं कि उनके विचार क्या हैं?
1. जहांगीर घई, कंज्यूमर एक्टिविस्ट
महानगरों में भी वाहन चालक को अधिकतम 15,000 रुपये वेतन मिलता है.
ट्रक ड्राईवर आम तौर पर समाज के सबसे निचले तबके से आते हैं
और वे दूर दराज के गांव में रहते हैं. उनके पास बचत के रूप में भी रकम नहीं होती.
अगर आप किसी दुर्घटना की स्थिति में ट्रक ड्राईवर से मुआवजे की उम्मीद रखेंगे तो यह अव्यावहारिक कदम होगा.
न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी की वजह से पहले ही ड्राईवर का पता लगाना मुश्किल होता है.
दुर्घटना के सालों बाद किसी ड्राईवर से मुआवजे की रकम वसूलना टेढ़ी खीर ही साबित होगा.
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इसी तरह अगर किसी वाहन मालिक को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए तो यह भी सही नहीं होगा.
इसमें भी क़ानूनी पेचीदगी है. कानून अमीर-गरीब में भेदभाव नहीं करता.
बहुत से लोग ट्रक कर्ज लेकर रोजगार करने के लिए खरीदते हैं.
ऐसे लोगों को मामूली मुआवजा देने में भी दिक्कत आ सकती है.
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इन सभी बातों को देखते हुए कानून में वाहन के लिए थर्ड पार्टी बीमा जरूरी बना दिया जाना चाहिए.
बीमा कंपनियों को चुकाए जाने वाले प्रीमियम से ही दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित को मुआवजा दिया जाना चाहिए.
2. शार्दुल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर शैलजा लाल
किसी वाहन से दुर्घटना होने की स्थिति में उसके ड्राईवर/मालिक से पीड़ित को
मुआवजा दिलाने का कदम सही नहीं है. इससे थर्ड पार्टी बीमा कवर खरीदने का उदेश्य विफल हो जाता है.
अगर कोई व्यक्ति अपने वाहन के लिए थर्ड पार्टी बीमा कवर खरीदता है और फिर किसी दुर्घटना की स्थिति में
अपनी जेब से मुआवजे का भुगतान करता है तो वह थर्ड पार्टी कवर क्यों खरीदेगा?
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पीड़ित व्यक्ति के हिसाब से भी वाहन के मालिक से मुआवजा लेने की
कोई प्रक्रिया नहीं है. इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा मिलेगा.
अगर किसी दुर्घटना की स्थिति में वाहन के मालिक/ड्राईवर की भी मौत हो जाती है
और दुर्घटना में किसी पीड़ित को भी नुकसान होता है तो वाहन मालिक को मिलने वाले
मुआवजे में से पीड़ित को एक हिस्सा देने का प्रावधान भी व्यावहारिक नहीं होगा.
थर्ड पार्टी बीमा कवर हर वाहन के लिए जरूरी बना दिया जाना चाहिए
और इस रकम से ही दुर्घटना पीड़ित को मुआवजा दिया जाना चाहिए.
3. राकेश जैन, ईडी एवं सीईओ, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस
बीमा खरीदने वाले ग्राहक को पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है.
आम तौर पर पीड़ित व्यक्ति द्वारा मुआवजे का दावा दुर्घटना के कुछ समय बाद किया जाता है.
कोर्ट में मामले की सुनवाई में भी कुछ साल का वक्त लगता है.
इस मौके पर वाहन के ड्राईवर या मालिक को ढूंढना मुश्किल काम है.
दुनिया के कुछ देशों में थर्ड पार्टी कवर में कम से कम एक निर्धारित रकम का प्रावधान है.
अमेरिका के अधिकतर राज्यों में यह रकम एक लाख डॉलर है. ड्राईवर अगर चाहे तो अलग से कवर खरीद सकता है.
अगर ड्राईवर पांच लाख डॉलर का कवर लेना चाहता है तो उसे बाकी चार लाख डॉलर के लिए
बीमा पॉलिसी खरीदनी होती है. भारत में अब तक मुआवजे की रकम की कोई सीमा नहीं है.
मेरी इस मामले में राय यह है कि अगर वाहन का मालिक/ड्राईवर चाहे
तो मुआवजे की रकम के लिए एड-ऑन कवर खरीद सके, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए.
4. कामेश गोयल, चेयरमैन, डिजिट जनरल इंश्योरेंस
देश में सड़क दुर्घटना दुनिया में सबसे अधिक होती है. मेरी राय यह है कि किसी दुर्घटना की स्थिति में
ड्राईवर पर 10,000 रुपये और पीड़ित की मृत्यु के मामले में 25,000 रुपये का जुर्माना किया जाना चाहिए.
वाहन के मालिक पर जुर्माने की रकम दोगुनी कर दी जानी चाहिए.
वाहन की ओवरलोडिंग, सही तरीके से मेंटेनेंस नहीं होने और गलत
लाइसेंस पर वाहन चलाने जैसे मामले में भी इसी तरह का जुर्माना होना चाहिए.
अगर पीड़ित व्यक्ति मुआवजे का दावा करने के लिए कोर्ट में जाता है
तो उसे काफी वक्त खर्च करना पड़ता है. देश में वाहनों के लिए
थर्ड पार्टी बीमा कवर में नो क्लेम बोनस का भी प्रावधान नहीं है.
किसी दुर्घटना की स्थिति में ड्राईवर/मालिक पर जुर्माना ही एक प्रावधान किया जा सकता है.
अगर किसी वजह से ड्राईवर का पता नहीं लग पा रहा हो तो यह जुर्माना वाहन मालिक से ही वसूला जाना चाहिए.
