Loneliness: ये पांच लक्षण अकेलापन के लिए हैं खतरे की घंटी! खुद से ही खुद को कर देगा दूर

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Loneliness: ये पांच लक्षण अकेलापन के लिए हैं खतरे की घंटी! खुद से ही खुद को कर देगा दूर

Loneliness:आज कल के भाग दौड़ भरे जीवन में खुद के लिए समय निकालना बहुत कठिन है.

ढ़ेर सारे काम का बोझ और जिम्मेदारियां की वजह से खुद के

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और हमारे भावनाओं के बीच में एक दूरी बन जाती है. जिसकी वजह से अपनी ही अंतरआत्मा से

दूरी महसूस होने लगती है. सरल शब्दों में कहें तो हम अपने आप से ही एक दूरी महसूस करने लगते हैं.

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ऐसे लोग किसी रोबोट से कम नहीं होते हैं. आइये जानते हैं कि खुद से ही दूरी महसूस करने के क्या लक्षण होते हैं?

खुद की भावनाओं पर नियंत्रण न होना

इमोशनल इंटेलिजेंस एक तरीके की भावनात्मक परिपक्वता को दर्शाता है.

यदि आप लगातार खुद की भावनाओं को नजरअंदाज करते हैं, तो अपने आप से ही दूरी बनने लगते हैं.

इसको एक उदाहरण से समझते हैं, जब आप अपने साथी से किसी बात पर नाराज होते हैं

तो क्या अपनी भावनाओं को जाहिर कर पाते हैं? या आप जानने की कोशिश करते हैं

कि आपको क्या चीज परेशान कर रही है? नाराज होना और अपनी

भावनाओं को आहत करना इस बात का संकेत हैं कि आप खुद से दूर हो रहें हैं.

 खुद के प्रतिक्रिया पर ही आश्चर्य होना

क्या आपने कभी किसी स्थिति में ऐसी प्रतिक्रिया की है जिससे आप खुद हैरान हो गए हों?

यदि आपकी प्रतिक्रिया का आपके वास्तविक स्वभाव मेल नहीं हो रहा है, तो ये पर्याप्त संकेत है

कि आप स्वयं से दूर हो रहे हैं. इससे बचने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है.

पिछली गलतियों का बार बार याद आना

खुद से अलग होने का ये सबसे बड़ा संकेत हैं कि इंसान अपनी पुरानी गलतियों को याद करके परेशान होता है.

जब आप खुद से कटा हुआ महसूस करते हैं, तो आप वर्तमान में अपनी

तर्क को सही साबित करने के लिए पुरानी बातों का सहारा ले सकते हैं.

खुद की इच्छाओं पर नियंत्रण न होना

जब कोई खुद से दूर होने लगता है तो उसे ये नहीं समझ आता है कि उसे किस चीज की जरूरत है

और वो क्या चाहता है. ऐसे में खुद के लिए समय निकालना बहुत जरूरी है

और उस काम को करने की जरूरत है जिसमें हमारा इंटरेस्ट है या जिस काम को करने में अच्छा लगता है.

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इस चीज को सोचें कि वास्तव में आपको किन चीजों से खुशी मिलती है, वो करें.

दूसरों को दोष देना

सेल्फ-कनेक्शन की कमी होने से इंसान दूसरों को, विशेषकर अपने जीवनसाथी को दोष देने लगता है.

दूसरों को दोष देना अगर किसी के आदत में शामिल हो चुका है तो ये एक खतरे का संकेत है.

इससे बचने के लिए खुद के बारे में सोचने की जरूरत है, योग के सहारे इसको सुधारा जा सकता है.

Disclaimer: प्रिय पाठक, संबंधित लेख पाठक की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए है. जी मीडिया इस लेख में प्रदत्त जानकारी और सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है. हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित समस्या के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें. हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है.

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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