Loan against property: प्रॉपर्टी पर लोन लेना चाहते हैं? ये बातें जान लीजिए तो फायदे में रहेंगे

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Loan against property: प्रॉपर्टी पर लोन लेना चाहते हैं? ये बातें जान लीजिए तो फायदे में रहेंगे

Loan against property: कई बार हमें अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है।

ऐसे में प्रॉपर्टी पर लोन (Loan against property) लेना अच्छा ऑप्शन नजर आता है।

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इससे दूसरे ऑप्शन के मुकाबले आपको ज्यादा अमाउंट का लोन मिल जाता है।

इसका इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) भी पर्सनल लोन (Personal Loan) के मुकाबले कम होता है।

लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी एक तरह का सेक्योर्ड लोन (Secured Loan) है।

इसमें आप अपने घर, इंडस्ट्रियल या कमर्शियल प्रॉपर्टी को गिरवी रख कर लोन ले सकते हैं।

आम तौर पर लोन अंगेस्ट प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कारोबार के विस्तार, मेडिकल इमर्जेंसी, शादी,

बच्चों की उच्च शिक्षा आदि के लिए लोन लेने के लिए किया जाता है।

बैंक प्रॉपर्टी पर लोन देने के लिए ग्राहक की इनकम, क्रेडिट हिस्ट्री और प्रॉप्रटी की वैल्यू को देखते हैं।

अगर आप प्रॉपर्टी पर लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके लिए कुछ चीजों के बारे में जान लेना जरूरी है।

लोन चुकाने की अपनी क्षमता देख लें

लोन लेने का फैसला करने से पहले आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि प्रॉपर्टी को गिरवी रखने में रिस्क है।

अगर आप हर महीने समय पर EMI नहीं चुकाते हैं तो प्रॉपर्टी आपके हाथ से निकल सकती है।

इसलिए आपको सिर्फ उतने ही अमाउंट का लोन लेना चाहिए, जिसकी EMI चुकाना आपके लिए

आसान हो। डिफॉल्ट की वजह से आपके क्रेडिट स्कोर पर भी खराब असर पड़ सकता है।

इंटरेस्ट रेट्स की तुलना कर लें

प्रॉपर्टी पर लोन का इंटरेस्ट रेट 9 से 18 फीसदी के बीच होता है। यह कई चीजों पर निर्भर करता है।

इसमें ग्राहक का क्रेडिट स्कोर, उसकी इनकम, लोन की अवधि आदि शामिल हैं।

इसलिए आपको लोन लेने से पहले यह देख लेना फायदेमंद रहेगा कि कौन बैंक किस इंटरेस्ट रेट पर लोन ऑफर कर रहा है।

प्रोसेसिंग फीस की जांच भी जरूरी

ज्यादातर बैंक लोन के अमाउंट का करीब 1 फीसदी की प्रोसेसिंग फीस लेते हैं।

कुछ बैंक लोन के अमाउंट के हिसाब से प्रोसेसिंग फीस लेते हैं। यह 50,000 रुपये से 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है।

आपको प्रोसेसिंग फीस की जांच करने के बाद बैंक का चुनाव करना चाहिए।

लोन की अवधि का भी रखें ध्यान

ज्यादातर बैंक 15 साल के लिए लोन अंगेस्ट प्रॉप्रटी देते हैं। लोन की अवधि इसलिए बहुत अहम है,

क्योंकि इसका असर आपकी ईएमआई पर पड़ता है। अवधि ज्यादा होने पर

ईएमआई कम रहती है। लेकिन, इंटरेस्ट के रूप में ज्यादा पैसा निकल जाता है।

फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट में से कौन फायदेमंद?

इंटरेस्ट रेट में मामूली बदलाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता। लेकिन

, इंटरेस्ट रेट में ज्यादा बदलाव का बहुत असर पड़ता है, क्योंकि लोन रिपेमेंट की अवधि ज्यादा होती है।

इसलिए आपको इंटरेस्ट रेट के हालात को देखते हुए फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट में से

सही चुनाव करना चाहिए। अभी जैसे हालात हैं, उसमें इंटरेस्ट रेट बढ़ने के आसार हैं।

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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