insurance company:यूपी के इस परिवार को मिलेंगे 15 लाख रुपये, जानें वजह
insurance company: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने हाथरस के महाराज ऑटो वल्र्ड के डीलर पर
पन्द्रह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। डीलर की लापरवाही के कारण सड़क दुर्घटना में मृतक के परिवार को
बीमा कंपनी से कोई क्लेम नहीं मिल सका है। इसलिए अब डीलर को पैसा अदा करना पड़ेगा।
सासनी क्षेत्र के गांव मोहरिया निवासी रामकुमार उर्फ नीलम कौशिक ने महाराज ऑटो वल्र्ड से छह नवम्बर 2018 को
बाइक खरीदी थी। बाइक खरीदते वक्त नीलम कौशिक ने बीमा और एआरटीओ पंजीकरण के लिये 5850 रुपये का
भुगतान डीलर के यहां जमा करा दिया। पैसा जमा करने के बाद नीलम कौशिक बाइक को लेकर चले गये।
23 नवम्बर 2018 को सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई और बाइक क्षतिग्रस्त हो गई।
लम कौशिक की पत्नी मालती देवी ने कोतवाली सासनी में मुकदमा दर्ज करा दिया।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
पति की मृत्यु के पश्चात नीलम ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की हाथरस शाखा में क्लेम का दावा किया
तो 18 दिसम्बर 2019 में बीमा कंपनी (insurance company) ने क्लेम को खारिज कर दिया,
क्योंकि जिस वक्त वाहन स्वामी के साथ दुर्घटना हुई उस वक्त बाइक पंजीकृत नहीं थी।
आयोग की शरण में पहुंची पत्नी
बीमा कंपनी (insurance company) के क्लेम निरस्त करने के बाद मृतक की पत्नी ने जिला उपभोक्ता विवाद
प्रतितोष आयोग की शरण में पहुंची।वहां उसने बीमा कंपनी, बाइक के डीलर और परिवहन अधिकारी को पार्टी बनाया।
उसके बाद आयोग ने बीमा कंपनी (insurance company) और परिवहन अधिकारी की ओर से शपथ पत्र
दिये गये।एआरटीओ ने बताया कि डीलर ने 11 नवम्बर 2018 को ऑन लाइन पंजीकरण शुल्क जमा किया
और 26 नवम्बर को बाइक पंजीकरण के लिये फाइल उनके कार्यालय में भेजी थी। 29 नवम्बर को पंजीकरन नम्बर
आवंटित कर दिया गया था,लेकिन महाराज ऑटोवल्र्ड की ओर से कोई जबाव दाखिल नहीं किया गया।
आयोग ने माना कंपनी के डीलर को दोषी
आयोग के अध्यक्ष राकेश कुमार चतुर्थ ने इस पूरे प्रकरण में महाराजा ऑटो वल्र्ड के डीलर को दोषी माना है।
कोर्ट ने बीमा कंपनी और परिवाहन विभाग को उत्तरदायित्वों से मुक्त कर दिया है।
महाराज ऑटोवल्र्ड को निर्देशित किया है कि वह दो माह के अंदर मृतक के परिवार को
पन्द्रह लाख रुपये की राशि अदा करे। निर्धारित समयावधि में धनराशि की अदायगी नहीं की जाती है
तो डीलर को निर्णय के दिनाक से अदायगी के वास्तविक दिनाक तक
सात प्रतिशत की साधारण व्याज दर के ब्याज भी अदा करनी पड़ेगी।
