insurance: हेल्‍थ इंश्‍योरेंस में को-पेमेंट क्‍या है? क्‍यों इससे घटता-बढ़ता है प्रीमियम और क्‍लेम

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insurance: हेल्‍थ इंश्‍योरेंस में को-पेमेंट क्‍या है? क्‍यों इससे घटता-बढ़ता है प्रीमियम और क्‍लेम

लोग अक्सर यह शिकायत करते हैं कि हेल्‍थ इंश्‍योरेंस ( insurance) कंपनियां ग्राहकों के क्‍लेम का पूरा

भुगतान नहीं करती हैं. क्‍लेम सेटलमेंट के वक्‍त वे नियम और शर्तों का पिटारा खोलकर बैठ जाती हैं

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और कोशिश करती हैं कि उन्‍हें कम से कम पैसा देना पड़े. परंतु, कंपनियों का तर्क है

कि पॉलिसी देते वक्‍त ही पॉलिसी दस्‍तावेजों में सारे नियम और शर्तों का उल्‍लेख होता है.

अपनी-अपनी जगह, दोनों ही सही हैं. हकीकत यह है कि अधिकतर लोग प्रीमियम और कवरेज को देखकर ही

पॉलिसी खरीद लेते हैं. वे न नियमों को जानने की कोशिश करते हैं और न ही शर्तें समझने की ज़हमत उठाते हैं.

अधिकतर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसियों में ऐसी ही एक शर्त होती है

को-पेमेंट (Co-Payment In Health Insurance) या सह-भुगतान की.

को-पेमेंट के बारे में ज्‍यादातर पॉलिसीधारकों कोई जानकारी नहीं होती. उन्‍हें इसका पता तभी चलता है

जब वे क्‍लेम के लिए आवेदन करते हैं और उन्‍हें कंपनी को-पेमेंट का हवाला देते हुए कम भुगतान करती है.

को-पेमेंट पॉलिसी प्रीमियम से लेकर क्‍लेम सेटलमेंट तक को प्रभावित करता है.

इसलिए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी लेते वक्‍त ही इसके बारे में अच्‍छे से जान लेना चाहिए.

क्‍या होता है को-पेमेंट?

को-पेमेंट या सह-भुगतान बीमा क्‍लेम का वो हिस्‍सा है, जिसे पॉलिसीधारक को खुद चुकाना होता है.

अलग-अलग हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी में को-पेमेंट प्रतिशत भी भिन्‍न-भिन्‍न हो सकता है.

आमतौर पर यह 10 से 30 फीसदी तक होता है. मान लेते हैं कि आपने जो बीमा पॉलिसी ली है,

उसका को-पेमेंट 30 फीसदी है. अब अगर आप 1,00,000 रुपये का क्‍लेम करेंगे

तो बीमा कंपनी आपको 70,000 रुपये ही देंगी. बाकि 30,000 रुपये आपको अपनी जेब से देने होंगे.

खास बात यह है कि पॉलिसीधारक जितनी बार क्लेम करता है, को-पेमेंट का नियम उतनी ही बार लागू होता है.

इस तरह को-पेमेंट स्वास्थ्य बीमा में पॉलिसीधारक और बीमाकर्ता के बीच एक समझौता है,

जिसमें पॉलिसीधारक अपने मेडिकल बिलों का कुछ प्रतिशत अपने दम पर भुगतान करता है और बाकि बीमा कंपनी देती है.

क्‍या यह पॉलिसी का अनिवार्य हिस्‍सा है?

बिल्‍कुल नहीं, यह जरूरी नहीं कि हर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी में को-पेमेंट का विकल्प हो.

यानी आपको अपने क्लेम का 100 प्रतिशत मिल सकता है. बहुत-सी कंपनियां ऐसी हेल्‍थ पॉलिसी भी देती हैं

जिनमें वह क्‍लेम का 100 फीसदी भुगतान करने के लिए उत्‍तरदायी होती हैं.

को-पेमेंट का प्रभाव

को-पेमेंट हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी पर काफी प्रभाव डालता है. बीमा पॉलिसी का प्रीमियम को-पेमेंट से निर्धारित होता है.

जिस पॉलिसी में को-पेमेंट का हिस्‍सा ज्‍यादा होता है, उसका प्रीमियम कम होता है.

इस मामले में इलाज खर्च पर बीमाधारक को अपनी जेब से ज्‍यादा पैसे देने पड़ते हैं.

वहीं, अगर को-पेमेंट किसी पॉलिसी में कम है तो उसका प्रीमियम ज्‍यादा होता है.

लेकिन, कम को-पेमेंट का फायदा यह होता है कि पॉलिसीधारक को इलाज खर्च के लिए अपनी जेब से कम पैसे देने पड़ते हैं.

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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