House: नया घर बनाने का सपना देखने वालों पर भारी पड़ गया त्योहारी सीजन
House: देहरादून में एमडीडीए में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत जमा हुए कई भवनों के नक्शे खारिज हो गए।
त्योहारी सीजन की छुट्टी और अफसरों की व्यस्तता की वजह से आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ
और इन नक्शों को पास करने की अवधि भी बीत गई। अब आर्किटेक्ट और
एमडीडीए के अफसर इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मगर, खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आर्किटेक्ट बोले, ओटीएस स्कीम के तहत निर्माण वैध
करवाने को बड़ी संख्या में लोगों ने नक्शे जमा करवाए। आपत्तियों के निस्तारण को 10 दिन का समय मिलता है,
लेकिन त्योहारी सीजन में छुट्टी और अफसरों के व्यस्त रहने के कारण इन आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो पाया।
आर्किटेक्टों का आरोप है कि छुट्टी के चलते एमडीडीए के अफसरों से कोई सहयोग नहीं मिला।
कुछ आपत्तियां बेवजह लगाई जा रही हैं। इस कारण कई नक्शे खारिज हो गए।
अब नियमानुसार भवन मालिक को एक तो स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा,
दूसरा आवासीय भवन की कंपाउंडिंग के लिए जमा पांच हजार और
कॉमर्शियल भवन के नक्शे को जमा 10 हजार रुपये का आवेदन शुल्क भी वापस नहीं मिलेगा।
उधर, एमडीडीए के अफसरों का तर्क है कि आर्किटेक्ट पूरे दस्तावेज नहीं लगा रहे हैं।
आपत्तियों को निर्धारित समय पर निस्तारित नहीं कराया जाता है।
स्कीम के तहत 4186 नक्शे आए। 2113 ही पास हुए। 162 नक्शे खारिज हुए। जबकि, 471 नक्शे अभी लंबित हैं।
केस-1: जीपी खंतवाल के अनुसार, उन्होंने सहारनपुर रोड के चार नक्शे जमा किए थे,
लेकिन अफसर ने 25 दिन फाइल अपने पास रखने के बाद इन्हें खारिज कर दिया।
उनका कहना है कि जब भवन मालिक लाखों रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कर रहे हैं
तो एक बार नक्शा खारिज होने पर दोबारा रि-ओपन क्यों नहीं हो सकता।
केस-2: सुनील घिल्डियाल ने बताया कि उन्होंने कोल्हूपानी में महेश खत्री का नक्शा ओटीएस स्कीम के तहत
जमा किया था। जो आपत्ति लगाई गई, वह उनके स्तर की नहीं थी।
उन्होंने अफसर से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन छुट्टी के चलते उनका फोन नहीं उठा।
आपत्ति निस्तारित नहीं होने के कारण यह नक्शा खारिज हो गया।
यदि सिस्टम की खामी के कारण कोई नक्शा खारिज हुआ है तो आर्किटेक्ट लिखित रूप से उसकी जानकारी दे।
ऐसे नक्शों पर एमडीडीए जरूर विचार करेगा। वन टाइम सेटलमेंट
स्कीम का उद्देश्य यही है कि लोग अपने निर्माण को वैध करवा सकें।
सोनिका, उपाध्यक्ष-एमडीडीए
एसोसिएशन का सुझाव
एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल इंजीनियर एंड टेक्निकल के अध्यक्ष अरविंद वर्मा ने बताया
कि ओटीएस स्कीम के तहत आर्किटेक्ट के पास दस दिन का ही समय रहता है।
ऐसे में बेवजह नक्शों पर ऑब्जेक्शन नहीं लगाए जाने चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि एमडीडीए का कोई अंदरूनी मामला है तो ऐसी
आपत्तियों का निस्तारण अफसर अपने स्तर से करें, न कि उसे
आर्किटेक्ट को भेजें। उनका कहना है कि काम सरकार के जीओ के मुताबिक हो।
