Electric Cars: बचत है, सब्सिडी है, फिर भी इलेक्ट्रिक कार नहीं खरीद रहे लोग, 5 कारणों से भाग रहे दूर
electric cars: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और दुनिया भर में पॉल्यूशन की प्रॉब्लम के साथ ही
अब ऑटो इंडस्ट्री ऑल्टरनेट ट्रांसपोर्ट फ्यूल के तौर पर इलेक्ट्रिसिटी को बेस्ट ऑप्शन मान रही है.
इसी के चलते इलेक्ट्रिक कारों की तेजी से मांग भी बढ़ रही है और इनके हर दिन नए मॉडल भी
कार मैन्युफैक्चरर्स लॉन्च भी कर रहे हैं. हालांकि अब भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं
जो इन कारों को लेना पसंद नहीं कर रहे हैं. इसके पीछे कुछ कारण हैं और वो छोटे नहीं हैं.
इलेक्ट्रिक कारों (electric cars) के साथ कुछ चैलेंजेज हैं जिन्हें जानना और समझना बहुत जरूरी है.
ऑटोमोबाइल कंपनियों का भी फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों पर है.
बावजूद इसके इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री उम्मीद से कम है. अगर आप भी एक
इलेक्ट्रिक कार (electric cars) खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो ये 5 सवाल आपको परेशान कर सकते हैं.
ये वे सवाल हैं जो कार खरीदने वाले हर शख्स के मन में उठते हैं.
कौन सी कार खरीदें?
अगर आप 10 लाख रुपये तक इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं तो आपके पास 1 ही ऑप्शन है.
टाटा टियागो ईवी. दूसरी ओर 10 लाख रुपये तक ढेर सारी पेट्रोल कार के ऑप्शन हैं.
इसमें हैचबैक, सब-कॉम्पैक्ट सेडान, क्रॉसओवर और माइक्रो एसयूवी शामिल हैं
. हालांकि, इससे ज्यादा कीमत में कार खरीदने वाले सीमित हैं.
हालांकि, आने वाले समय में 10 लाख के अंदर भी इलेक्ट्रिक कार (electric cars) के कई ऑप्शन मिल सकते हैं.
कहां चार्ज होगा वाहन?
एक इलेक्ट्रिक कार सिटी यूज के लिए अच्छी हो सकती है, लेकिन जो लोग कभी-कभी लंबी यात्रा पर जाते हैं
उनके लिए इलेक्ट्रिक कार लेकर जाना एक समस्या भरा काम हो सकता है.
क्योंकि अभी हाईवे पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रोपर व्यवस्था नहीं है.
हां, अगर घर और ऑफिस तक आना-जाना है तो कोई दिक्कत की बात नहीं है.
क्यों खरीदें महंगी इलेक्ट्रिक कार?
इलेक्ट्रिक कार अभी काफी महंगी हैं. अगर आप हर दिन लंबी गाड़ी नहीं चला रहे हैं,
तो पेट्रोल-डीजल पर जो लागत बच सकती है, उसे वसूलने में कई साल लग जाएंगे.
इलेक्ट्रिक कार तभी बेहतर हैं, जब आपकी डेली रनिंग ज्यादा हो. वरना आपको चुकाई गई
ज्यादा कीमत वसूलने में कई साल लग जाएंगे. यह स्थिति पेट्रोल पर खर्च करने से ज्यादा महंगी पड़ सकती है.
कौन खरीदेगा पुरानी इलेक्ट्रिक कार?
अभी तक कुछ पता नहीं है कि सेकेंड हैंड कार मार्केट में एक इलेक्ट्रिक कार की कितनी मांग होगी?
इसके अलावा एक और चिंता यह है कि क्या इलेक्ट्रिक कारों की रीसेल
वैल्यू उतनी होगी, जितनी अभी आम पेट्रोल-डीजल कारों की होती है.
कब तक चलेगी कार की बैटरी?
ज्यादातर कंपनियां बैटरी पर आठ साल की वारंटी दे रही हैं. इसमें भी कई तरह के नियम और शर्तें लागू हैं
बैटरी की लागत कम हो रही है, यह अभी भी एक इलेक्ट्रिक कार का सबसे महंगा पार्ट है.
इसे बदलने में काफी खर्च करना पड़ सकता है. बैटरी को ठीक
करने या बदलने के लिए पैसा खर्च करना बजट के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है.
