Car Insurance : क्यों महंगा होता है इलेक्ट्रिक कार का इंश्योरेंस? प्रीमियम घटाने के ये हैं आसान उपाय
Car insurance : देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और वायु प्रदूषण को लेकर लोगों के बीच बढ़ी जागरुकता के चलते
इलेक्ट्रिक कार हमारी यात्रा जरूरतों के लिए एक अधिक प्रैक्टिकल और लॉन्ग टर्म समाधान बनकर उभरा है.
जीरो कार्बन एमिशन करने वाले इन वाहनों को चलने के लिए ईंधन की जरूरत नहीं होती है और ये बैटरी पर चलते हैं. इनका मेंटिनेंस करना भी आसान है.
हालांकि, ईंधन से चलने वाली कारों की तरह भारतीय सड़कों पर आप अपनी इलेक्ट्रिक कार को भी बिना कार इंश्योरेंस के नहीं दौड़ा सकते हैं.
इलेक्ट्रिक कार आम तौर पर महंगी होती है. ऐसे में एक कार इंश्योरेंस पॉलिसी आपको कार के एक्सीडेंट,
चोरी होने या अन्य किसी दुर्घटना की स्थिति में फाइनेंशियली मजबूत रखती है.
अब जब इलेक्ट्रिक कार महंगी होती हैं, तो उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी भी सामान्य कारों की तुलना में थोड़ी महंगी होती है.
आगे जानें कि इलेक्ट्रिक कार का इंश्योरेंस क्यों महंगा होता है और कैसे इसकी लागत कम की जा सकती है.
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बीमा पॉलिसी महंगी होने की 3 प्रमुख वजह
इलेक्ट्रिक कारों के बीमा की लागत ईंधन से चलने वाली कारों के मुकाबले अधिक होती है. इसकी 3 प्रमुख वजह ये हैं…
1. इलेक्ट्रिक कार अधिक महंगी होती हैं: इलेक्ट्रिक कारों के लिए कार बीमा महंगा होने की पहली वजह ये है
कि ये सामान्य ईंधन कारों के मुकाबले महंगी होती है. इलेक्ट्रिक कारों को बहुत करीने से डिजाइन किया जाता है,
ताकि इनसे शून्य प्रदूषण हो और यात्रियों को अधिक से अधिक कंफर्ट मिल सके.
ये महंगी और आधुनिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से डिजाइन होती है, इसलिए इनकी लागत अधिक होती है.
कार की ऊंची कीमत की वजह से इनके लिए इंस्युर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) भी अधिक होती है,
जिसके चलते इनका इंश्योरेंस प्रीमियम भी अधिक होता है. इलेक्ट्रिक कारों को शुरुआत में खरीदना महंगा लगता है,
लेकिन लंबी अवधि में ये काफी कम खर्चीली और अधिक एफिशिएंट पड़ती हैं.
2. रिपेयर और रिप्लेसमेंट कॉस्ट अधिक होना: इलेक्ट्रिक कारों में ईंधन से चलने वाली कारों की तुलना में भले स्पेयर
पार्ट्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन इन्हें रिपेयर और रिप्लेसमेंट कराने की लागत अधिक होती है.
उदाहरण के लिए ये कार हाई-पॉवर की लीथियम-आयन बैटरी पर चलती हैं.
इन बैटरियों को बदलने की लागत पूरी कार की लगभग आधी कीमत के बराबर होती है.
निश्चित तौर पर इनकी बैटरियों को रिपेयर करना या रिप्लेस करना महंगा है.
इतना ही नहीं, ये बैटरी पहले से एक एक्सपायरी डेट के साथ आती हैं, जिसके बाद कार के मालिक को उन्हें बदलवाना
होता है. इस वजह से बीमा कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों के लिए अधिक प्रीमियम लेती हैं.
3. स्पेशलाइज्ड टेक्नीशियन का सीमित संख्या में होना: देशभर में आम कारों के मैकेनिक और एक्सपर्ट आपको कहीं
भी मिल जाएंगे. जबकि इलेक्ट्रिक कारों की रिपोयरिंग के लिए आपको विशेष कौशल और
तकनीकी ज्ञान रखने वाले लोग चाहिए, और उन्हें ढूंढना मुश्किल है.
इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक कार अभी भी भारतीय ऑटो बाजार के लिए नई हैं
और इनकी रिपेयर फैसिलिटी काफी सीमित है. इलेक्ट्रिक कारों की रिपेयरिंग के लिए
जो कुशल टेक्नीशियन और रिपेयर फैसिलिटीज हैं, वो अधिक शुल्क वसूलते हैं.
इसलिए बीमा कंपनियां इन कारों के इंश्योरेंस के लिए ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं.
इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर्स का इंश्योरेंस प्रीमियम कम करने के तरीके
इलेक्ट्रिक कार के इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए कई फैक्टर्स काम करते हैं. जैसे कि कवरेज का अमाउंट, गाड़ी की कॉस्ट,
आपका ड्राइविंगअनुभव और आपकी इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री क्या रही है. हालांकि इसमें से कुछ फैक्टर्स आपके नियंत्रण में
नहीं है, लेकिन आप कुछ तरीके अपना कर अपनी इलेक्ट्रिक कार के इंश्योरेंस की लागत को कम कर सकते हैं…
1. इलेक्ट्रिक कार में सिक्योरिटी डिवाइस लगाएं: इलेक्ट्रिक कारों में रिप्लेसमेंट की लागत अधिक होती है.
आप अपनी कार में एंटी-थेफ्ट और अन्य समान तरह के सुरक्षा उपकरण लगा सकते
हैं. ये आपकी गाड़ी को चोरी जैसी घटनाओं से बचा सकते हैं.
इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे सिक्योरिटी डिवाइस को प्रीमियम
कैलकुलेट करते वक्त अपने कैलकुलेशन में शामिल करती हैं.
ऐसे आप अपनी कार की सुरक्षा बढ़ाकर बीमा की लागत कम कर सकते हैं.
2. कार इंश्योरेंस ऑनलाइन खरीदें: सस्ते में इलेक्ट्रिक कार इंश्योरेंस खरीदने का एक स्मार्ट तरीका है
कि आप इसे ऑनलाइन मोड में खरीदें. आप इलेक्ट्रिक कार के लिए
अलग-अलग कंपनियों के इंश्योरेंस कंपेयर कर सकते
हैं. इन पर मिलने वाले ऑफर को कंपेयर कर सकते हैं और अपनी
पॉकेट हिसाब से मैक्सिमम कवरेज देने वाली पॉलिसी का चुनाव कर सकते हैं.
इतना ही नहीं, आप अपने बजट के हिसाब से इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम जानने के लिए
Car insurance कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसमें आप अपनी इच्छानुसार कवरेज के हिसाब से प्रीमियम
का कैलकुलेशन कर सकते हैं. इस तरह आप अपने बजट से बाहर जाकर मोटर बीमा पॉलिसी खरीदने से बच जाते हैं.
3. नो-क्लेम बोनस का इस्तेमाल करें: हर साल
इंश्योरेंस क्लेम नहीं फाइल करने की वजह से आपकी
बीमा कंपनी नो-क्लेम बोनस के तौर पर रिवॉर्ड देती है. इस बोनस का इस्तेमाल कर
आप कम प्रीमियम पर अधिक से अधिक कवरेज वाली बीमा पॉलिसी ले सकते हैं.
अगर आप ड्राइव अच्छे से करते हैं और अपनी गाड़ी का मेंटिनेंस सही से करते हैं,
तब आप हर साल क्लेम नहीं पर मिलने वाले नो-क्लेम बोनस का इस्तेमाल कर सकते हैं.
हर साल इकट्ठा होते इस बोनस से आप इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम कम कर सकते हैं.
4. छोटे क्लेम करने से बनाएं दूरी: कार इस्तेमाल करने पर
उसमें छोटी-मोटी टूट-फूट होना या रिपेयरिंग करवाना
सामान्य बात है. हालांकि इसके लिए या हर छोटे रिपेयर के लिए
आपको इंश्योरेंस क्लेम करने से बचना चाहिए.
इस तरह आपका साल ‘क्लेम-फ्री’ रहने की संभावना बढ़ जाती है,
और फिर आपको नो-क्लेम बोनस का फायदा मिलता है.
जो आखिर में पॉलिसी प्रीमियम को कम करता है.
लोगों को सलाह दी जाती है कि वो गाड़ी छोटी-मोटी रिपेयर का खर्चा खुद से करें, ना कि हर बार बीमा क्लेम करें.
समझने वाली बात
इलेक्ट्रिक कार जीरो-एमिशन वाहन होते हैं. ईंधन की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच
ये एक प्रैक्टिकल समाधान हैं. इन कारों की शुरुआती लागत भले ज्यादा होती हो,
लेकिन लंबी अवधि में ये कम मेंटिनेंस और कॉस्ट-इफेक्टिव गाड़ियां साबित होती हैं.
इलेक्ट्रिक कारों के लिए बीमा की लागत ईंधन वाली गाड़ियों के मुकाबले अधिकह होती है.
हालांकि आप कुछ तरीके अपनाकर अपना पॉलिसी प्रीमियम कम कर सकते हैं.
टाटा एआईजी जैसी बीमा कंपनी लगातार 5 साल बीमा क्लेम नहीं लेने पर ग्राहकों को उनके
Car insurance प्रीमियम पर 50 प्रतिशत तक का
डिस्काउंट देती है. इतना ही नहीं लोगों को उनकी महंगी
इलेक्ट्रिक कार के इंश्योरेंस कवरेज के साथ जोड़ने के लिए 18 एड-ऑन विकल्प भी मिलते हैं.
