Exposure: आदमखोर बाघिन का हर राज खोलेगी उसकी खाल, डब्लूआईआई की ये है तैयारी
exposure: फतेहपुर रेंज में मृत मिली बाघिन आदमखोर थी या नहीं इसका खुलासा उसकी खाल में
धारियों की जांच से होगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून (डब्लूआईआई) बाघिन की खाल में
धारियों की जांच करेगा। अधिकारियों ने जांच के लिए खाल को देहरादून भेज दिया है।
फतेहपुर रेंज की हैड़ाखान बीट में शनिवार रात को वन विभाग की
गश्त टीम को बाघिन का शव मिला था। बाघिन की उम्र करीब 7-8 साल थी।
बाघिन का शव मिलते ही एक ही सवाल उठा कि यह वही बाघिन तो नहीं जिसने फतेहपुर रेंज में लोगों को अपना
शिकार बनाया था। बाघिन आदमखोर थी या नहीं इसका पता उसक शरीर की धारियों की जांच से लगेगा।
इसके लिए बाघिन की खाल को डब्लूआईआई देहरादून भेज दिया गया है। गौरतलब है कि 29 दिसंबर 2021 से 6 जून
2022 तक फतेहपुर रेंज में 7 लोगों को बाघ और बाघिन ने अपना शिकार बनाया था।
हर बाघ-बाघिन की अलग अलग होती हैं धारियां
बाघ के शरीर पर धारियों के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से इंसान के फिंगरप्रिट उन्हें अलग और विशेष
बनाते हैं, उसी तरह हर बाघ के शरीर पर बनी काली धारीदार पट्िटयां भी अलग-अलग होती हैं।
धारियों का पैटर्न हर बाघ में अलग होता है। इससे वन विभाग को इनकी
पहचान करने में आसानी होती है। बाघों की गणना में भी मदद मिलती है।
साफ्टवेयर से होगा मिलान
डब्लूआईआई ने पूर्व में फतेहपुर रेंज में लगे सीसीटीवी और जंगलों में मिलने पंजों के निशान देखकर बताया था
कि आदमखोर एक नर और एक मादा है। साफ्टवेयर की मदद से पूर्व में सीसीटीवी में कैद बाघिन और
जिस बाघिन का शव मिला है उसकी खाल में धारियों की जांच करेगा।
इसके बाद मृत मिली बाघिन के आदमखोर होने या न होने का खुलासा होगा।
बाघिन की धारियों से उसकी सही पहचान हो सकेगी। उसकी धारियों को जांचने का साफ्टवेटर डब्लूआईआई के पास है।
जिसके चलते मरी मिली बाघिन की खाल को जांच के लिए डब्लूआईआई भेज दिया गया है।
