पॉवर ऑफ attorney को लेकर योगी कैबिनेट का फैसला, रजिस्ट्री जैसा स्टांप चार्ज, सिर्फ परिवार को राहत
यूपी की योगी सरकार ने स्टांप चोरी रोकने के लिए खून के रिश्ते वाले ही मुख्तारनामे यानी
पावर ऑफ attorney को मान्य करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ।
पहले पॉवर ऑफ अटॉर्नी देने में महज 50 रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब उसे रजिस्ट्री की तरह स्टांप ड्यूटी देना होगा।
यानी जैसे प्रॉपर्टी होगी, वैसी ही रजिस्ट्री की फीस चुकानी होगी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को बताया कि मुख्तारनामे के माध्यम से कोई व्यक्ति किसी को अपनी तरफ से या अपने
काम करने के लिए अधिकृत कर सकता है। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 में दी गई
व्यवस्था के आधार पर मुख्तारनामे का पंजीकरण कराया जाना अनिवार्य नहीं है।
इसके बाद भी सामान्य जन में इसे पंजीकृत कराने की प्रवृत्ति है और हर साल इसके आधार पर पंजीकरण की
संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पिछले पांच सालों में प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में
पंजीकृत मुख्तारनामे के आधार पर रजिस्ट्री कराने की संख्या 102486 है।
इसीलिए सरकार ने स्टांप चोरी रोकने के लिए खून के रिश्ते वाले मुख्तारनामे को ही मान्य करने का फैसला किया है।
इसके अलावा मुख्तारनामे पर रजिस्ट्री कराने वालों को पूरा स्टांप शुल्क देना होगा।
उन्होंने बताया कि खून के रिश्तेवालों का 5000 रुपये के स्टांप पर पंजीकरण कराया जा सकेगा।
खून के रिश्तेवालों में पिता, माता, पति, पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री, दामाद, भाई, बहन, पौत्र, पौत्री, नाती व नातिन आएंगे।
