well: जलस्तर की डीटेल के साथ फोटो भी होगी अपलोड, जलदूत एप से सुधरेंगे गांवों के कुओं के दिन
well: गोरखपुर में कभी गांवों में कुंए ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत थे।
अत्याधुनिकता की अंधी दौड़ में कुंए पट गए या क्षतिग्रस्त होकर नष्ट हो गए। जो बचे-खुचे हैं
उनकी भी साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। भारत सरकार अब उनके अस्तित्व की सुरक्षा करेगी।
गांवों में तैनात ग्राम रोजगार सेवक मानसून से पहले और मानसून के बाद जलदूत एप पर जलस्तर अपलोड करेंगे।
कुंए पहले गांवों में पीने के पानी के बेहतर स्रोत थे। खेतों में सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल होते थे।
कुंआ (well) खुदवाना कभी पुण्य का काम माना जाता था। कुओं की साफ-सफाई करने वालों की
गांवों में खूब पूछ होती थी। साल में दो बार कुंओं की सफाई होती थी।
उसके पानी को शुद्ध करने के लिए तरह-तरह की तरकीबें अपनाई जाती थीं। कुंओं की महत्ता कायम रहे।
कुओं को कोई क्षति न पहुंचाए इसके लिए उसे धर्म-कर्म से भी जोड़ दिया गया था।
गांव में जब किसी युवक की शादी होती थी तो उसकी मां उसे साथ लेकर कुंए का भांवर घूमती थीं।
इसे संस्कार से जोड़ा गया था। हाल के कुछ वर्षों में कुंओं (well) पर संकट खड़ा होने लगा है।
ग्राम पंचायतों में अधिकतर कुंए या तो पाट दिए गए हैं या फिर उन एन-केन-प्रकारेण कब्जा जमा लिया गया है।
खेतों में खुदे अधिकतर कुंओं का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
भारत सरकार की एक पहल ने अब कुंओं के अस्तित्व की सुरक्षा की आस जगा दी है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार ने जलदूत एप जारी किया है।
इस एप पर अब गांवों में तैनात ग्राम रोजगार सेवक मानसून आने से पहले और
मानसून की समाप्ति के बाद जलस्तर का मापन कराकर जलदूत एप पर अपलोड कराएंगे।
ग्राम रोजगार सेवकों के न रहने पर सचिव की जिम्मेदारी
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ग्राम रोजगार सेवक बाकायदा इस निर्देश का पालन करेंगे।
जिन ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सेवक नहीं होंगे, वहां पंचातय सचिव इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
इस काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुओं की फोटो भी की जाएगी अपलोड
ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की ओर सेे कहा गया है कि जिन कुंओं को ग्राम रोजगार सेवकों द्वारा
जलस्तर अपलोड किया जाएगा उनकी फोटो भी ली जानी है।
इतना ही नहीं फोटो को भी जलदूत एप पर अपलोड किया जाना है।
