Snakes: विकास दुबे को सांप ने सिर्फ एक बार काटा,बाकी छह बार वह स्नेक फोबिया का व हुआ शिकार,जानें 

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Snakes: विकास दुबे को सांप ने सिर्फ एक बार काटा,बाकी छह बार वह स्नेक फोबिया का व हुआ शिकार,जानें 

Snakes:यूपी के फतेहपुर से एक अजीब मामला सामने आया. विकास दुबे नाम के शख़्स ने दावा किया कि उसे 40 दिन के अंदर 7 बार सांप ने काटा.

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हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने जांच की तो पता चला कि विकास दुबे को सांप ने सिर्फ एक बार काटा.

बाकी छह बार वह स्नेक फोबिया का शिकार हो गया. तो आखिर स्नेक फोबिया है क्या? समझते हैं…

क्या है फोबिया?

फोबिया मतलब किसी चीज से डर. फोबिया एक तरह की मानसिक बीमारी है.

इसमें व्यक्ति के मन में किसी वस्तु, जगह अथवा स्थिति (सेचुएशन) के प्रति बहुत ज्यादा डर बैठ जाता है.

नोएडा साइकेट्रिक क्लीनिक (Noida Psychiatric Clinic) के डायरेक्टर डॉ. आरके बंसल  कहते हैं कि डर और फोबिया में अंतर है. डर एक सामान्य प्रतिक्रिया है.

जब हमें कोई खतरा नजर आता है तो डरना स्वाभाविक है, पर फोबिया अवास्तविक होता है.

उदाहरण के लिए, किसी को कॉक्रोच का इतना फोबिया हो सकता है कि उसे हर जगह कॉक्रोच ही नजर आए.

भले ही उसे पता हो कि वास्तव में क्रॉक्रोच है नहीं या उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकता.

कितने तरह का होता है फोबिया?

1. एक्रोफोबिया: तमाम लोग ऐसे होते हैं जिन्हें ऊंचाई से डर लगता है. इसे एक्रोफोबिया (Acrophobia) कहते हैं.

उदाहरण के तौर पर बहुत लोग को छत पर जाने से डर लगता है,

मल्टी स्टोरी बिल्डिंग या ऊंची इमारतों में नहीं जाना चाहते, पहाड़ पर जाने से डरते हैं.

2. क्लॉस्ट्रोफ़ोबिया: इसका मतलब है बंद जगहों का डर. क्लॉस्ट्रोफ़ोबिया (Claustrophobia) से पीड़ित लोग अक्सर छोटे कमरे, लिफ्ट, सुरंग और कार में बैठने से बचते हैं. उनके मन में हमेशा बिना वजह डर बना रहता है.

3. एगोराफोबिया: खुली जगहों या भीड़ का डर. एगोराफोबिया से पीड़ित लोगों को खुली जगहों, भीड़भाड़ वाली जगहों, बाजार, मॉल जैसी जगहों पर जाने से डर लगता है. उन्हें लगता है कि ऐसी जगहों पर उन्हें नुकसान पहुंच सकता है.

4. एरैकनोफोबिया: यह दुनिया में सबसे आम प्रकार के फोबिया में से एक है. एरैकनोफ़ोबिया से पीड़ित शख़्स हमेशा मकड़ियों के बारे में सोचता रहता है.

उसे हर जगह मकड़ियां या उसके जाले दिखाई देते हैं. व्यक्ति को घबराहट के दौरे पसीना आना, कांपना, चक्कर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

5. जोफोबिया: बहुत सारे लोगों को जानवरों का डर होता है, इसे जोफोबिया कहते हैं. उदाहरण के तौर पर कुछ लोगों को हमेशा कुत्तों से डर लगा रहता है,

तो कुछ को बिल्ली से. डॉ. आरके बंसल कहते हैं कि फतेहपुर वाले केस में विकास दुबे जोफोबिया से ग्रस्त नजर आते हैं.

उन्हें सांप (snakes) ने सिर्फ एक बार काटा, पर उनके मन में सांप को लेकर इतना ज्यादा डर बैठ गया कि फोबिया का शिकार हो गए.

फोबिया के कारण:

आनुवंशिकी: फोबिया की सबसे मुख्य वजह अनुवांशिकी है. डॉ. आरके बंसल कहते हैं कि यदि आपके परिवार में किसी को फोबिया की हिस्ट्री है तो इस बात की ज्यादा आशंका है कि आपको भी फोबिया विकसित हो जाए.

दर्दनाक अनुभव: किसी भयानक या दर्दनाक अनुभव से भी फोबिया विकसित हो सकता है.

शिक्षा: कई बार गलत जानकारी या नकारात्मक अनुभवों से भी फोबिया विकसित हो सकता है.

क्या है फोबिया का इलाज?

डॉ. आरके बंसल कहते हैं कि फोबिया का शुरुआती इलाज थैरेपी या काउंसिलिंग है.

फोबिया से पीड़ित व्यक्ति को समझाते हैं कि उसका डर अवास्तविक है.

उदाहरण के तौर पर अगर किसी को लिफ्ट से डर लगता है तो हम उसे साथ लिफ्ट में ले जाते हैं और समझाते हैं कि उसे कोई खतरा नहीं है.

कब पड़ती है दवा की जरूरत?

कई मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ती है. डॉ. आरके बंसल कहते हैं कि कई बार फोबिया के चलते कुछ लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं. इस केस में दवा देने की जरूरत पड़ती है.

 

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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