pollution: प्रदूषण रोकने को हर जिले में होगा नंदन वन, पीपल, पाकड़, इमली व आम समेत औषधीय महत्व के लगेंगे पौधे

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pollution: प्रदूषण रोकने को हर जिले में होगा नंदन वन, पीपल, पाकड़, इमली व आम समेत औषधीय महत्व के लगेंगे पौधे

pollution: जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने और प्रदूषण से निपटने को

वन विभाग तैयारी कर रहा है। जुलाई में होने वाले वृहद्ध पौधारोपण में इस बार हरीतिमा संबर्द्धन के

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प्रति सजगता उत्पन्न करने के लिए सभी जिलों में एक-एक नंदन वन तैयार किया जाएगा।

इसमें सघन पौधरोपण किया जाएगा। नंदन वन शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण(pollution) की

रोकथाम के साथ ही उसके नियंत्रण व लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने में सहायक सिद्ध होगा।

वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने इसे सभी जिलों में तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इसके बाद बरेली मंडल में भी इसे लगाने के लिए स्थान का चिह्नांकन किया जा रहा है।

प्रभागीय वनाधिकारी समीर कुमार ने बताया कि सभी जिले में इस बार नंदन वन के साथ आयुष

वन व सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम्य वन की स्थापना की जाएगी। बरेली में सभी 1193 ग्राम पंचायतों

में ग्राम्य वन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए जिला पंचायती राज अधिकारी के माध्यम से सभी

को निर्देशित किया जा चुका है। प्रत्येक ग्राम्य वन में न्यूनतम 1600 पौधे लगाए जाएंगे।

इसमें खाद्य, प्रकाष्ठ, चारा प्रजाति व बहु उपयोगी पौधे लगाए जाएंगे।

ग्राम्य वन से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन, स्थानीय जैव विविधता संरक्षण व अनुकूल सूक्ष्म

जलवायु के निर्माण के साथ-साथ मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, ईंधन, चारा,

फल, लकड़ी आदि बुनियादी जरूरतों, किसानों की आय में वृद्धि होगी।

जबकि नंदन वन चार श्रेणियों में तैयार होगा। इसमें तीन श्रेणी में

वृक्ष प्रजाति व चतुर्थ श्रेणी में झाड़ी प्रजाति के पौधे लगेंगे। प्रभागीय वनाधिकारी,

समीर कुमार ने कहा कि सभी जिलों में नंदन वन, आयुष वन बनाए जाएंगे।

इसके अलावा सभी जिलों की ग्राम्य पंचायतों में ग्राम्य वन स्थापित किए जाएंगे।

इसके लिए स्थान चिह्नित कर गड्ढों को खोदने का काम किया जाएगा।

आयुष वन में औषधीय महत्व के लगेंगे पौधे

औषधि प्रजाति के वृक्षों के महत्व व उनसे मिलने वाले लाभ से जनमानस को जागरूक करने के

लिए प्रत्येक जिले में वन विभाग आयुष वन की स्थापना की जाए। प्राकृतिक रूप से इलाज व

शरीर की स्वस्थता के लिए परम्परागत चिकित्सा पद्धति का विशेष महत्व है।

पीपल, पाकड़, इमली व आम पौधों की पहली श्रेणी में

हरड़, बहेड़ा, महुआ, चिरौंजी, सेमल, बरगद, पीपल, पाकड़, इमली, आम, एवं कुसुम पहली

श्रेणी में, दूसरी श्रेणी में नीम, शीशम, जामुन, आंवला, बेल, कैंथा, लसोडा, बांस, जैकरैण्डा

अमलतास, केसिया, स्यामिया, पेल्टाफोरम, देशी अशोक, बालम खीरा, कदम्ब, मौलश्री,

गम्हार के पेड़ लगेंगे। तीसरी श्रेणी में अर्जुन, ढाक, कंजी, अमलतास, कचनार, हरश्रृंगार, चंदन, पारस,

पीपल, केसिया, जवानिका, केसिया नोडोसा, पुत्रजीवा, गुलाचीन व सहजन के पेड़ लगेंगे।

जबकि चौथी श्रेणी में वोगेनवीलिया, चांदनी, सर्पगंधा समेत अन्य हैं।

 

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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