Plant: UP में अब गन्ने से गुड़ और चीनी के साथ बनेगा पीने का पानी,इस शहर में लगा प्लांट
plant: गन्ने से चीनी और गुड़ बनना आम बात है। पर गन्ने से शुद्ध पेयजल बनेगा। इसे लखीमपुर के खमरिया में जुआरी इंडस्ट्रीज की गोविंद शुगर मिल ऐरा ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
मिल प्रबंधन का मानना है कि गन्ने से निकले पानी का शोधन करके उसे सामान्य पेयजल से ज्यादा गुणवत्तापरक बनाया जा रहा है। ऐरा चीनी मिल ने गन्ने के पानी को शुद्ध करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट लगाया है।
गन्ने की पकी फसल में करीब 70 फीसदी पानी की मात्रा होती है। अभी तक गन्ने के जूस को सीरप और फिर उससे शक्कर बनाने तक की प्रक्रिया में गन्ने में मौजूद पानी को काफी खर्चीले तरीके से वाष्पीकृत करके अलग किया जाता है।
जो अमूमन किसी काम में नहीं लाया जा सकता था। गोविंद शुगर मिल के प्रोडक्शन केमिस्ट और वाटर एनलसिस्ट आदि की टीम ने एक अभिनव प्रयोग किया है।
गोविंद शुगर मिल ने करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से एक जल शोधन संयंत्र लगाया है। जो गन्ने के पानी को अलग करके शुद्ध करने के बाद पीने योग्य बना रहा है।
गोविंद शुगर मिल के यूनिट हेड आलोक सक्सेना ने बताया कि गन्ने का पानी सामान्य पेयजल के मानकों से कहीं बेहतर है। उन्होंने बताया कि गन्ने से निकलने वाला पेयजल पूरी तरह सुरक्षित है।
इस संयंत्र के चलने से जल, वायु व मृदा प्रदूषण काफी हद तक खत्म करने की दिशा में ऐरा चीनी मिल का यह प्रयोग लोगों की सेहत सुधारने का काम करेगा। यूनिट हेड आलोक सक्सेना ने बताया कि गन्ने से तैयार किया गया पानी का औद्योगिक इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने से बने पानी को स्टीम बनाने के लिए सीधे ब्वायलर फीडिंग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले ब्वायलर फीडिंग के लिए सामान्य पानी को विभिन्न रसायनों के जरिये पहले चार्ज किया जाता है।
जो न सिर्फ आर्थिक तौर पर काफी खर्चीली प्रक्रिया होती है। बल्कि ड्रेनेज से प्रदूषण फैलने का भी खतरा रहता था। पर गन्ने के पानी के औद्योगिक इस्तेमाल से प्रदूषण से पूरी तरह बचाव किया जा सकता है।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी पैकेजिंग
यूनिट हेड आलोक सक्सेना ने बताया कि नए संयंत्र में गन्ने से तैयार होने वाला पानी पेयजल के मानकों पर खरा उत्तरा है। यह पानी रसायनिक तौर पर पीने के मानक पूर्ण करता है, पर इसका उपयोग विभिन्न स्तर पर जांच और सम्बंधित संस्थाओं से स्वीकृति के बाद ही किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि लैब टेस्ट और अनुमति के बाद इस पानी की पैकिंग और पैकेजिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यूनिट हेड में बताया कि गन्ने से निर्मित पेयजल को सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाजार में आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
जल दोहन से भी होगा बचाव
ऐरा चीनी मिल में गन्ने से पानी निकालने वाले संयंत्र में रोजान 1800 मीटर क्यूब जल तैयार होगा यह पानी सामान्य पेयजल के मानक बेहतर है। अभी तक स्टीम प्रोडक्शन के लिए पानी की जरूरत बोरिंग के जरिये पूरी की जा रही है।
पर इस संयंत्र के चलने के बाद ऐरा चीनी मिल में ब्वायलर फीडिंग के लिए जरूरत का पानी बोरिंग के जरिये नहीं निकलना पड़ेगा। जिससे भूगर्भी जल स्तर में किसी प्रकार की गिरावट नहीं आएगी।
यूनिट हेड अलोक सक्सेना ने बताया कि हर स्तर पर पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षा चीनी मिल की प्राथमिकता में है। जिसके तहत यह संयंत्र लगाया गया है।
