medical colleges में 5 घंटे तक बिना इलाज तड़पकर मर गई गर्भवती, डिप्टी CM ने CMS को किया सस्पेंड, अब…
medical colleges: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहंचकर भी सिद्धार्थनगर की एक
गर्भवती को इलाज नहीं मिला। वह पांच घंटे तक ओपीडी के पास तड़पकर मर गई।
मामले को शासन के संज्ञान में लाते हुए एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिकायत की।
इस पर जांच के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ.एके श्रीवास्तव
को निलंबित कर दिया है। प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने ट्वीट कर कार्रवाई की जानकारी दी।
उन्होंने यह ऐक्शन शासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की संस्तुति पर लिया है
लेकिन अब जांच समिति की रिपोर्ट पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि सीएमएस डॉ. एके श्रीवास्तव घटना के दिन बीआरडी में थे ही नहीं। उनका कहना है
कि वह एक मामले में गवाही देने के लिए वह कुशीनगर की जिला अदालत में गए थे।
इसकी लिखित जानकारी बीआरडी प्रशासन को दी थी। इसकी सूचना शासन व जांच समिति को भी दी थी।
वहीं, घटना के दिन प्राचार्य भी अवकाश पर थे। प्राचार्य डा. गणेश कुमार ने बताया कि
इस कार्रवाई के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अभी शासन से कोई पत्र नहीं आया है।
यह है मामला
बीते 22 जुलाई को सिद्धार्थनगर के बेलहरा के संदीप त्रिपाठी गर्भवती पत्नी चंद्रा त्रिपाठी को गंभीर हालत में
सुबह सात बजे बीआरडी मेडिकल कालेज (medical colleges) लेकर पहुंचे। उनके गर्भ में जुड़वा शिशु थे।
उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी के डॉक्टरों ने सुपर
स्पेशियलिटी में हृदय रोग विभाग में जाने की सलाह दी। हृदय रोग विभाग की टीम ने देखने के बाद मरीज को
मेडिसिन में इलाज कराने की सलाह दी। मेडिसिन से उन्हें गायनी भेज दिया गया।
इस बीच पुराने ओपीडी के पास चंदा दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करना जरूरी नहीं समझा।
अस्पताल पहुंचने के बाद भी पांच घंटे तक मरीज को इलाज नहीं मिला।
दोपहर 12 बजे के करीब गर्भवती ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही उसके गर्भस्थ जुड़वा शिशुओं की मौत हो गई।
इमरजेंसी में बैठने लगी गायनी की टीम
इस घटना के बाद बीआरडी (medical colleges) की इमरजेंसी में कई बदलाव हुए।
वाकए के एक हफ्ते बाद गायनी की टीम को भी ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी से जोड़ा गया।
रोजाना एक टीम की ड्यूटी ट्रॉमा सेंटर में लगती है। यह टीम ट्रॉमा सेंटर
पहुंचने वाली गर्भवतियों की सेहत की निगरानी भी करती है।
