lawyer court: मुकदमों में सरकारी वकील के स्थगन मांगने से हाईकोर्ट नाराज
lawyer court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के नाम पर सरकारी वकीलों द्वारा मुकदमों में स्थगन
मांगने की रवायत पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि आजकल फैशन हो गया है
कि रिकॉर्ड न होने के नाम पर या निर्देश या जवाबी हलफनामा दाखिल करने के नाम पर मुकदमों में स्थगन की
मांग सरकारी वकील की ओर से की जाती है। ऐसा करने से कोर्ट
का बहुमूल्य समय तो बर्बाद होता ही है, वादकारियों को भी दिक्कत होती है।
सदीम व दो अन्य की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कहा कि
इस कोर्ट में कुल 115 केस लिस्ट में थे। जिनमें से 62 मुकदमों में अंतिम आदेश किया गया।
35 मुकदमों में अंतरिम आदेश दिए गए जबकि 20 मुकदमे ऐसे हैं
जिनमें अपर शासकीय अधिवक्ता ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कहकर
स्थगन की मांग की। जबकि इन मुकदमों की लिस्ट दो दिन पूर्व जारी हो गई थी।
राज्य की ओर से इस प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है बल्कि वह कोर्ट को विवश करती है
कि इस प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि
ऐसे मौकों पर जब राज्य प्राधिकारियों की वजह से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता है,
सरकारी वकील सबसे ज्यादा असुरक्षित हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में ऐसा न हो।
इसका हलफनामा प्रस्तुत किया जाए कि मुकदमे राज्य के अधिकारियों की गलती से स्थगित नहीं किए जाएंगे।
यदि ऐसा होता है तो कोर्ट भारी हर्ज़ाना लगाएगी। कोर्ट ने इस आदेश की
कॉपी महाधिवक्ता (lawyer court) और प्रमुख सचिव न्याय को भेजने का निर्देश दिया है ।
