Elephant: जंगल में भिड़े टस्कर और मकना हाथी,पानी को लेकर जबरदस्त टकराव,गजराज की लड़ाई देख वनकर्मियों के पसीने छूटे
Elephant: UP के बिजनौर में पानी की तलाश में दूसरे हाथियों के इलाके में आए एक मकना हाथी को घुसना भारी पड़ गया। टस्कर हाथी ने मकना हाथी को दूर तक दौड़ा डाला। घंटो तक चले आपसी संघर्ष को शांत कराने में वनकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
या यूं कि वन कर्मियों के पसीने छूट गए। अमानगढ़ रेंज में वन्यजीवों के लिए पानी और आहार की प्रचुरता होने के कारण कार्बेट के वन्यजीव भी अमानगढ़ की ओर रूख करने लगते हैं।
जहां वनक्षेत्र के वन्यजीव दूसरे क्षेत्र के वन्यजीव की आमद पसंद नही करते नतीजतन वन्यजीवों में संघर्ष होता हैं। अमानगढ़ रेंज के कोठीरो बीट में अपनी प्यास बुझाना एक मकना हाथी को महंगा पड़ गया।
जहां पहले से मौजूद एक टस्कर हाथी ने मकना हाथी को खदेड़ कर भगा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कई घंटों तक चले आपसी संघर्ष में मकना हाथी वापस लौटने को मजबूर हो गया।
क्षेत्रीय वनाधिकारी अमानगढ़ खुशबू उपाध्याय ने बताया कि दो हाथियों के भिड़ंत होने की सूचना मिली थी। मौके पर वनकर्मियों को भेजा गया था।
आपसी संघर्ष में कोई हाथी घायल नहीं पाया गया। अक्सर इस मौसम में हाथियों में आपसी संघर्ष की घटनाएं होती रहती हैं।
रेंज स्टाफ को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ ज्ञानेश सरन खुशारिया का कहना है कि वन्यजीवों में आपसी संघर्ष होना साधारण घटना है।
अक्सर वन्यजीव दूसरे वन्यजीवों का अपने परिवेश में आना पसंद नहीं करते जिस कारण इस प्रकार की घटना होती हैं। सर्दी और गर्मी के मौसम के बीच हाथियों का टैपेंरिन बढ़ने लगता हैं और वह मस्त हो जाते हैं।
हाथियों का यह मस्त कॉल होता है जो लगभग डेढ़ माह तक चलता है। इस दौरान हाथियों में हथिनी पर अधिकार सिद्ध करने के लिए जंग होती है।
चूंकि मकना हाथी दंतविहीन होता है इस कारण इस संघर्ष में वह अपना बचाव न कर पाने के कारण गंभीर घायल भी हो जाता हैं।
