Doctor: जिले में धड़ाधड़ नौकरी छोड़ रहे डॉक्टर, सात का इस्तीफा, चार ने दिया नोटिस
Doctor: पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे यूपी के मुरादाबाद जिले के सरकारी
अस्पतालों को सात Doctor के इस्तीफा दे देने का झटका लगा है।
इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों में छह एमबीबीएस और एक स्पेशलिस्ट शामिल है।
इसके अलावा चार Doctor ने नौकरी छोड़ने का नोटिस विभाग को दे दिया। जिससे खलबली मच गई है।
शहरी क्षेत्र के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के संचालन की कमान एमबीबीएस डिग्री धारकों को
सौंपने के प्रावधान के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग कई बार वॉक इन इंटरव्यू करके
अपने साथ 18 एमबीबीएस को जोड़ सका। चालीस पदों के सापेक्ष स्वास्थ्य विभाग को
सिर्फ अठारह डॉक्टर ही मिल सके थे। इनमें से छह ने ज्वाइन ही नहीं किया था।
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अब छह डॉक्टरों ने इस्तीफा दे डाला। इन हालात से सकपकाया विभाग अब भर्ती के लिए
29 सितंबर को एमबीबीएस अभ्यर्थियों के अगले इंटरव्यू की तैयारी में जुट गया है।
क्या बोले सीएम
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.कुलदीप सिंह ने बताया कि भर्ती होने के बाद सेवा छोड़ने के
इच्छुक एमबीबीएस डिग्री धारक चिकित्सकों को एक महीने पहले इसका नोटिस देना अनिवार्य है।
ऐसा न करने पर उसे अपना एक महीने का वेतन विभाग को करना होगा।
जिला अस्पताल में स्पेशलिस्ट ने दिया झटका
मंडल स्तर के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ श्रेणी के अंतर्गत ऑर्थोपेडिक सर्जन की शासन से सीधी भर्ती हुई थी।
जिससे मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रबंधन को काफी राहत मिली थी, मगर,
इस स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने भी इस्तीफा देकर सरकारी सेवा से किनारा
कर लिया। सीएमएस डॉ. संगीता गुप्ता ने इसकी पुष्टि की।
सीएचओ के लिए नौकरी छोड़ना महंगा
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हेल्थ वेलनेस सेंटर्स की कमान सीएचओ यानि कम्युनिटी हेल्थ
ऑफिसर्स को सौंपी गई है। एमबीबीएस की तरह सीएचओ के लिए नौकरी छोड़ना इतना आसान नहीं है।
उससे तीन साल से पहले नौकरी न छोड़ने का बांड भरवाया जा रहा है।
तीन साल से पहले नौकरी छोड़ने पर उन्हें 1.80 लाख रुपये की पगार विभाग को वापस करनी होगी।
