Chain: मानवता किया शर्मसार जंजीरों में जकड़कर 10 साल से पेड़ से बंधा है युवक
Chain: यूपी में एक बार फिर मानवता शर्मसार हो गई। झांसी जिले के तहसील मऊरानीपुर के गांव कंजा चितावत में
एक अधेड़ को ग्रामीणों ने पिछले 10 साल से जंजीरों से जकड़कर पेड़ से बांधकर रखा है।
करीब 46 डिग्री साए में चिलचिलाती धूप में यहां बचाव के भी कोई इंतजाम नहीं है।
न ही उसके बदन पर कपड़े हैं। पेड़ के नीचे जंजीरों में बंधा ये शख्स हर मौसम की मार सहता है।
दरअसल ग्रामीणों ने जिस व्यक्ति को पेड़ के नीचे बांधा है वह मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है।
ग्रामीणों की मानें तो वह किसी को भी पत्थर, लकड़ी या कुछ अन्य चीज मार देता था।
इसके बाद परिजनों ने ऐसा उठाया है। गांव कंजा चितावत निवासी
सामंतु उर्फ बटई उर्फ बेटी (50) की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। कई साल पहले वह लोगों को देखकर
पत्थर मारकर घायल कर चुका था। कई अस्पताल पहुंच चुके थे तो कई गंभीर चोटिल हो गए थे।
ग्रामीण दहशत में थे
ग्रामीण दहशत में थे तो परिवार वाले परिजनों के साथ आए दिन झंझट होती थी।
इसकी शिकायतें जब अधिक बढ़ गई तो परिवार वाले भी कठोर बन गए। वह उसे पहाड़ी ले गए।
वहां जंजीरों (Chain) जकड़ा और पेड़ की डाली से रस्सी से बांध दिया।
करीब 10 साल से वह बिना कपड़ों के वहीं बंधा है। सर्दी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम से बचाव के लिए
कोई इंतजाम नहीं है। इन दिनों पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच भी बटई
चिलचिलाती धूप में पेड़ से बंधा रहा। यह देख मन झकझोक उठता है।
कंजा चितावत के नीरज सिंह कहते बटई उर्फ बेटी दिमाग से कमजोर है।
वह लोगों देखते ही पत्थर मारता था। लोग बताते हैं कि कई अस्पताल पहुंच चुके थे।
10 साल हा गई। घर वाले पानी-खाना देते हैं। पर, धूप मे बंधा रहता है। कोई छाया की व्यवस्था उसके पास नहीं है।
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह इलाज नहीं करा सते। प्रशासन मदद करे तो हो सकता है
कि वह ठीक हो जाए। राघवेद्र कहते हैं कि बारह महीने बटई उर्फ बेटी वहीं बंधा रहता है।लोग उसके पास तक नहीं जाते।
ताकि वह पत्थर न मार दे। इनकी मां और भैया है। वह खाना देते हैं। दूर से पानी पिलाते हैं।
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि यह अपने आपको सामंतु बताता है। कहता है कि यह लोग बंदा से पकड़कर लाए थे।
लोगों के अनुसार यह व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होने के चलते गांव वालों पर पत्थर मारने लगा था।
लेकिन घर वालों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। जिसकी चलते उसे यही बंधा दिया गया।
ग्रामीणों ने इसे शासन-प्रशासन से इलाज के लिए भिजवाए जाने की मांग की है।
