Certificate:जन्म-मृत्यु का तुरंत प्रमाण पत्र न देने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई,मुख्य सचिव ने दिए आदेश
certificate: अस्पताल में बच्चे के जन्म और किसी की मौत के साथ ही
प्रमाणपत्र जारी न करने वाले अस्पतालों पर यूपी सरकार शिकंजा कसेगी।
मुख्य सचिव ने ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
इस आदेश की हद में प्राइवेट के साथ ही सरकारी अस्पताल भी शामिल हैं।
शत-प्रतिशत जन्म-मृत्यु पंजीकरण की अब शासन स्तर से भी निगरानी की जाएगी।
राज्य में हर महीने करीब पौने दो लाख बच्चे जन्म लेते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार
इनमें से 83 फीसदी प्रसव संस्थागत होते हैं। यानि बच्चे अस्पताल में जन्म लेते हैं।
अस्पताल में पैदा होने वाले सभी बच्चों के मामले में मां की अस्पताल से छुट्टी होने से
पहले जन्म का पंजीकरण कर प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
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ठीक इसी तरह किसी भी स्थिति में अस्पताल में मौत होने पर उसे भी
पंजीकृत कर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया जाना है। लेकिन जन्म और मृत्यु दोनों ही मामलों में
शत-प्रतिशत ऐसा नहीं हो पा रहा। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने इसे लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
सभी जिलाधिकारियों, जो जिला रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु) भी हैं,
को लापरवाही करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल शासन ने सभी प्रकार के सरकारी अस्पतालों के प्रभारी चिकित्साधिकारी को ही
पंजीकरण का अधिकार दे रखा है। वहीं निजी अस्पतालों को सूचनादाता के रूप में
अलग से लॉगिन आईडी दे रखी है। सरकारी अस्पतालों के लिए जिले में
एसीएमओ (आरसीएच) और निजी अस्पतालों के लिए एसीएमओ (क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट) को
नोडल अधिकारी बनाया गया है। इनकी जिम्मेदारी गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों को
चिन्हित कर कार्यवाही करने की होगी। इसकी नियमित रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय व शासन को भी भेजनी होगी।
निदेशक प्रशासन होंगे प्रदेश के नोडल
सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों पर शत-प्रतिशत जन्म-मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए
कई स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। अब स्वास्थ्य महानिदेशालय के
निदेशक प्रशासन आर. राजागणपति को प्रदेश स्तर पर इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जिन जिलों के नोडल अधिकारी इस काम में ढिलाई बरतेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
