Biometric attendance: यूपी सरकार ने जारी किया आदेश! अब इन कर्मचारियों को भी लगानी होगी बायोमेट्रिक हाजिरी वरना नहीं मिलेगी सैलेरी
Biometric attendance: यूपी सरकार ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में भी बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी को अनिवार्य कर दिया है।
इसके तहत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बिना बायोमेट्रिक हाजिरी लगाये वेतन नहीं मिलेगा।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से आदेश जारी कर दिये गये हैं।
इस आदेश के बाद माध्यमिक स्कूलों के करीब 1.43 लाख शिक्षा एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बिना बायोमेट्रिक हाजिरी लगाये वेतन नहीं मिल सकेगा।
कर्मचारियों की बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति हुईअनिवार्य
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेन्द्र देव की ओर से सभी जिला विद्यालय निरीक्षक के नाम जारी इस आदेश में कहा गया है
कि राजकीय माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें
और तय प्रारूप पर (सॉफ्ट एवं हार्ड कापी में) ई-मेल के माध्यम से निदेशक कार्यालय को प्रतिदिन (अवकाश को छोड़कर) उपलब्ध करायें।
यह भी कहा गया है कि संस्था प्रधान अनिवार्य रूप से अपने विद्यालय के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के प्रतिमाह के वेतन बिल के साथ
बायोमेट्रिक उपस्थिति भी भेजेंगे ताकि उसी आधार पर वेतन बिल पारित करने की कार्यवाही की जा सके।
अधिकारी-कर्मचारी भी ड्यूटी टाइम आवे
माध्यमिक शिक्षकों के संगठन राजकीय शिक्षक संघ ने स्कूलों में बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य करने का स्वागत करते हुए इसे विभाग के सभी संवर्ग के अधिकारियों के कार्यालयों में भी लागू करने की मांग की है।
ताकि विभाग में अधिकारी-कर्मचारी भी ड्यूटी टाइम में अपनी सीटों पर मिल सकें और समय से ड्यूटी पर पहुंच सकें।
संघ के अध्यक्ष रामेश्वर पाण्डेय ने बयान जारी कर कहा है कि विभाग में सभी स्तर पर बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू होने से एकरूपता आएगी
और हमारी भी विभागीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाकात हो जाया करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर संगठन की मांग को पूरा नहीं किया गया तो उनका संगठन बायोमेट्रिक उपस्थिति का विरोध करेगा।
प्राइमरी स्कूलों में बढ़ने की बजाय और घट गई शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी
स्कूल शिक्षा महानिदेशालय की ओर से पूरी मशीनरी को झोंके जाने के बाद भी शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को ऑनलाइन हाजिरी कम हो गई।
शुक्रवार को प्राइमरी विद्यालयों के 0.61 फीसदी शिक्षकों ने ऑनलाइन हाजिरी लगाई जबकि छुट्टी के समय 0.33 प्रतिशत शिक्षकों ने उपस्थिति दर्ज की परन्तु शनिवार को
ऑनलाइन उपस्थिति का आंकड़ा घट गया जबकि सभी जिलों में बीएसए के नेतृत्व में विभागीय अधिकारियों को सक्रिय किया गया था।
कई स्कूलों में वेतन रोकने की दी गई धमकी
अधिकारियों से कहा गया था कि वे शिक्षकों को ऑनलाइन ऐप के इस्तेमाल के लिए समझा-बुझाकर तथा भावनात्मक लगाव का हवाला देकर इसके लिए प्रेरित करेंगे लेकिन अधिकारियों का यह प्रयास काम नहीं आ रहा लगता है।
कारण शनिवार को सुबह के समय कुल 6,09,564 शिक्षकों में से मात्र 2120 शिक्षकों अर्थात मात्र 0.39 प्रतिशत अध्यापकों ने ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की जबकि छुट्टी के समय यह संख्या कल की अपेक्ष घटकर 0.31 फीसदी रह गया।
हालांकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि आज जो उपस्थिति दर्ज हुई है वह भी अधिकारियों के डराने-धमकाने की वजह से हुई है। कई स्कूलों में वेतन रोकने की धमकी दी गई जिससे कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति लगा दी।
कई और जिलों के शिक्षकों ने छोड़ा अतिरिक्त कार्यभार
प्राइमरी शिक्षकों की ओर से ऑनलाइन हाजिरी का विरोध दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
प्रदेश भर में शिक्षकों की ओर से संकुल प्रभारी, बूथ लेबल अधिकारी, एबीआरसी, जिला समन्यवयक ,बाढ़ आदि कार्यो लगाए गए पदों से त्याग पत्र देना शुरू कर दिया है।
शनिवार को बरेली,आगरा,अलीगढ़, अमेठी, कुशीनगर, मऊ तथा शामली में डेढ़ सौ से अधिक शिक्षकों ने अतिरिक्त प्रभार के रूम में प्राप्त संकुल प्रभारी के पद से इस्तीफा दे दिया।
शुक्रवार को भी आगरा, एटा, मैनपुर, इटावा समेत अनेक जिलों के पांच दर्जन से अधिक शिक्षकों ने सामूहिक रूप से अपने खण्ड शिक्षा अधिकारियों को अपने सारे अतिरिक्त कार्यभार से इस्तीफा भेज दिया था।
शिक्षक नेताओं का दावा है कि सोमवार को जब स्कूल खुलेंगे तो बाकि बचे जिलों में भी सभी शिक्षक अपने अतिरिक्त प्रभार से इस्तीफा दे देंगे।
शिक्षकों को डराना-धमकाना उचित नहीं- शिक्षक संगठन
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कहा कि शिक्षाधिकारी शिक्षकों पर जबरन ऑनलाइन उपस्थिति देने का दबाव बना रहे हैं
और उन्हें विभागीय कार्यवाही करने की कहकर डरा भी रहे हैं जो कि अनुचित है।
शिक्षाधिकारियों को शिक्षकों की जायज समस्याओं एवं व्यवहारिक स्थिति से महानिदेशक को अवगत कराना चाहिये, लेकिन इसकी उलट वे शिक्षकों पर दबाव बना रहे हैं।
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा है कि शिक्षकों को डरा धमकाकर कर ऑनलाइन कोई कार्य नही कराया जा सकता है, कोई भी शिक्षक शिक्षण कार्य के अलावा अब विभाग का किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कार्य नहीं करेगा।
सोशल मीडिया पर सरकारी ग्रुपों को भी छोड़ रहे शिक्षक
ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में अब प्राइमरी शिक्षक सोशल मीडिया पर विभाग की ओर से बनाये लगये ग्रुपों को भो छोड़ना शुरू कर दिया है।
कर्मचारी नेता दिनेश सिंह शर्मा की अपील पर शनिवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े सभी ग्रुपों को छोड़ दिया।
