नारायणी नदी मे चैत पूर्णिमा के अवसर पर लोगों ने आस्था की लगाई डुबकी, मोक्ष की कामना
खड्डा/कुशीनगर: जनपद के खड्डा नगर से 7किमी दूर नारायणी नदी मे चैत पूर्णिमा के अवसर पर
लगभग 5 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर मनोकामना की पूर्ति के लिए
भैसहा महारानी के मंदिर में पूजन अर्चन किया। इस मौके पर पुलिस व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही।
बताते चलें कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर नारायणी नदी में स्नान कर भैसहा महारानी के
दरबार में पूजन अर्चन करने का महात्म अनादिकाल से चला आ रहा है।
पहले माता का मंदिर नारायणी नदी की बीच धारा में था।
गांव और मंदिर कटने के बाद जब लोग सुरक्षित जगह पर बस गए तो माता ने स्वप्न में दर्शन दिया
तत्पश्चात मंदिर की स्थापना हुई और मेला लगने लगा।
मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूजन करने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ऐसी मान्यता है
इस वर्ष चैत पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के भिन्न-भिन्न दूरदराज के इलाकों से
श्रद्धालु 1 दिन पहले ही भैसहा गांव में आ जाते हैं और रात भर रहने के बाद
सुबह नारायणी नदी में स्नान कर भैसहा महारानी के मंदिर में कपूर अगरवत्ती जलाते हैं।
वहीं जिनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं वह श्रद्धालु कड़ाही भी चढ़ाकर मां जगदंबा से परिवार
की कुशलता के लिए आशीर्वाद भी लेते हैं। मेले की व्यवस्था ग्राम प्रधान द्वारा कराई जाती है।
व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए प्रधान प्रतिनिधि गोलू गुप्ता ने बताया कि
प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस की भारी व्यवस्था भी रही
चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहे। जिसका नतीजा यह रहा कि
रात में रुकने वाले श्रद्धालुओ की सुरक्षा व्यवस्था बनी रही।
मेले में सभी प्रकार की दुकान आई हुई है बच्चों के लिए झूला व अन्य खेल सामग्री विशेष आकर्षण
का केंद्र रहा। गांव के युवा लड़कों ने टीम बनाकर पुलिस के सहयोग में जमे रहे।
बरसाती नाम की एक श्रद्धालु ने बताया कि माता रानी के आशीर्वाद से हमारे घर में एक पुत्र की
पैदाइशी हुई तब से हम लगातार हर वर्ष चैत पूर्णिमा पर नारायणी नदी में
स्नान कर माता का पूजन करते हैं इनके साथ बिहार प्रदेश से दो बस श्रद्धालु आए हुए हैं
इस वर्ष मेले में काफी भीड़ है पहले लकड़ी की दुकाने आती थी
वह इस वर्ष देखने को नहीं मिली है। ऐसे में चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला मेला क्षेत्रीय
लोगों के साथ-साथ दूरदराज से आए हुए लोगों के लिए
आकर्षण का केंद्र रहा पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की संख्या अधिक रही।
