farmers :देश में किसानों की हालत चिंताजनक, राष्ट्रीय किसान सभा चलाएगी अभियान
farmers: देश में किसानों की स्थिति और खेती किसानी को समृद्ध बनाने के लिए
राष्ट्रीय किसान सभा देशव्यापी अभियान चलाएगी।
इस अभियान के तहत गांव गांव किसानों से संपर्क किया जाएगा और उनकी स्थिति का आंकलन
करने के बाद एक प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को सौंपा जाएगा,जिससे देश में किसानों की सही
स्थिति का अंदाजा लग सके और किसानों को समर्थ बनाया जा सके.
यह निर्णय गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के सभागार में
राष्ट्रीय किसान सभा के प्रतिनिधि सम्मेलन में लिया गया.
यह आयोजन स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर किया गया था.
सम्मेलन में राष्ट्रीय किसान सभा के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय ने
स्वामी सहजानंद सरस्वती के कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने
किसानों को लेकर एक बड़ा आंदोलन चलाया। सहजानंद सरस्वती ने 1937 से लेकर
1942 तक अखिल भारतीय किसान सभा के माध्यम से देश के किसानों को संगठित करने का
काम किया, लेकिन 1942 में सभी नेताओं के जेल जाने के कारण यह संगठन दलीय
राजनीति का शिकार बन गया और इस तरह किसानों और मजदूरों का
देशव्यापी संगठन खड़ा करने का सपना टूट गया. उसी सपने को साकार करने के लिए
राष्ट्रीय किसान सभा का गठन किया गया और अब धीरे धीरे इसका विस्तार पूरे देश में किया जाएगा।
इस अवसर पर सर्वसम्मति से सामाजिक कार्यकर्ता
डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा को राष्ट्रीय किसान सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया.
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे बालेश्वर त्यागी ने कहा कि
वर्तमान समय में किसानों की आवाज उठाना बहुत जरूरी है. उन्होंने रामाशीष राय के
इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय किसान सभा का गठन करके
श्री राय ने बहुत ही साहसिक प्रयास किया है. बालेश्वर त्यागी ने कहा कि
यह संगठन किसानों के बीच अच्छा कार्य करे और निडर होकर किसानों की समस्याओं को उठाए।
त्यागी ने कहा कि जब भी राष्ट्रीय किसान सभा को उनकी जरूरत होगी वह उपलब्ध रहेंगे।
वरिष्ठ समाजसेवी रामनगीना बाबू ने कहा कि आज का समय ऐसा हो गया है
कि खेती किसानी को दोयम दर्जे का काम मान लिया गया है,
जबकि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने कहा था कि अन्न देने वाला किसान भगवान से भी बड़ा है,
क्योंकि जन्म के बाद इंसान की कोई भूख शांत करता है,
तो वह किसान ही है. ऐसे में इस अन्नदाता के विषय में सोचने की जरूरत है
और मुझे पूरा विश्वास है कि राष्ट्रीय किसान सभा इस दिशा में बेहतर कार्य करेगा।
उन्होंने किसानों की स्थिति बताते हुए कहा कि आज किसान मजबूरी में अपनी जमीनें बेचकर
बच्चों को शहर में पढ़ाने के लिए भेज रहा है और अपने बच्चों को गांव न आने की नसीहत देकर
उसे नौकरी करने की सलाह देता है, क्योंकि खेती किसानी घाटे का सौदा हो गई है.
वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने रामाशीष राय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि
राष्ट्रीय किसान सभा किसानों की आवाज बुलंद करेगी ऐसा मेरा पूरा विश्वास है.
अवधेश कुमार ने कहा कि खेती किसानी सामूहिकता का काम है,
लेकिन सरकारी व्यवस्थाओं के कारण आज गांवों में खेती किसानी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे.
उन्होंने मनरेगा के बारे में कहा कि मनरेगा की वजह से खेतों में काम करने वाले नहीं है,
ऐसे में खेती किसानी चौपट हो रही है. अवधेश कुमार ने याद दिलाया कि
जब पूरा विश्व कोराना की चपेट में था, सारे उद्योग-धंधे बंद थे,
तब गांव व गांव का किसान ही था कि वह लगातार काम कर रहा था
और देश के जीडीपी में अपना योगदान दे रहा था, इसलिए
किसानों की स्थिति में सुधार लाने के प्रयास जरूरी हैं.
राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिलोक त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय किसान सभा
किसानों के हित में कार्य करे, वह संगठन के साथ पूरे मनोयोग से खड़े हैं.
उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा को कहा कि वह किसी दल के नाते नहीं,
बल्कि एक किसान का बेटा होने के नाते यह बात कह रहे हैं
कि हमें किसानों की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है और किसानों की
स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि
राष्ट्रीय किसान सभा सिर्फ खेती किसानी और किसान पर ही काम न करे,
बल्कि खेती किसानी के जरिये उद्योग धंधे कैसे खड़े किए जाएं इस
पर एक नीति बनाकर युवाओं को और किसानों को जागरूक करे जिससे गांवों में ही रोजगार पैदा
हो और गांवों से शहरों की तरफ का पलायन रूके। उन्होंने कहा कि
सिर्फ मशीन नहीं हाथ आधारित उद्योग धंधों को बढ़ावा देने की जरूरत है.
इस अवसर पर राष्ट्रीय किसान सभा के महामंत्री व पूर्व वरिष्ठ भाजपा नेता सच्चिदानंद राय ने कहा
कि वर्तमान में किसानों की स्थिति देखकर काफी चिंता होती है.
उन्होंने कहा कि खेती किसानी पर बात करना जरूरी है
और किसानी को फायदे का धंधा बनाने की भी अत्यंत आवश्यता है.
राय ने कहा कि किसान से बड़ा जीवटता वाला कोई नहीं है.
किसान ही है जो अपना सबकुछ दांव पर लगाकर अपनी पैदवार भगवन भरोसे छोड़ देता है.
उसी पैदवार के भरोसे कभी बिटिया के हाथ पीले करने तो कभी बेटे को पढ़ाने का सपना देखता है.
उन्होंने कहा कि पूरे देश के भरण पोषण का कोई काम करता है तो वह किसान है
और आज वही किसान हासिए पर चला गया है. हमें इसे रोकना होगा।
उन्होंने राष्ट्रीय किसान सभा की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यह संगठन देश भर में किसानों
को संगठित करने का काम करेगा और सरकारों को किसानों की शक्ति का अहसास भी कराएगा।
साथ ही राष्ट्रीय किसान सभा के प्रस्तावों पर चर्चा भी की गई.
किसान सभा के राष्ट्रीय मंत्री गिरीश राय ने किसानों की स्थिति पर चर्चा करते हुए
कहा कि खेती किसानी में लागत बढ़ गई है और स्थिति यह है
कि खेती किसानी के भरोसे बच्चों की फीस तक नहीं भरी जा सकती।
उन्होंने किसान सभा के प्रस्तावों को पढ़ा जिसे प्रतिनिधि सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित कर
दिया गया. कार्यक्रम का संचालन आशीष राय ने किया.
इस मौके पर गांधी पीस फाउंडेशन के पूर्व सचिव व वर्तमान में राष्ट्रीय किसान सभा के
संरक्षक सुरेन्द्र कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील कुमार त्यागी, मानस राय, जिला पंचायत सदस्य
अनिकेत त्यागी ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में ओंकार सिंह,
प्रो अरुण कुमार सिंह, सूर्यभान राय, प्रशांत मिश्रा, अरविंद राय, प्रमोद राय, मनमोहन सिंह,
देवेन्द्र राय, योगेन्द्र त्यागी, अवनीश राय, मोतीलाल शुक्ला, ब्रजेश कुमार पांडेय,
अभिषेक चतुर्वेदी, आशुतोष सिंह, रतिश प्रसाद त्यागी, अरुणेश कुमार त्यागी,
गौरव त्यागी, प्रदीप त्यागी, मनोरंजन सिंह, सुमेश्वर तिवारी, रंजीत, अमित कुमार शर्मा,
ओमप्रकाश नारायण, इंजीनियर पंकज सिंह, धनेश गौतम, नरेंद्र पांडेय, वरुण पांडेय,
अभिनंदन सिंह, क्रांति प्रकाश समेत सैकडों की संख्या में लोग मौजूद रहे.
