donation:दूल्हा-दुल्हन ने शादी के दिन लिया अंगदान का संकल्प, 60 परिजन भी तैयार, जानिए भारत में  अंग दान का क्या है स्टेटस

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donation:दूल्हा-दुल्हन ने शादी के दिन लिया अंगदान का संकल्प, 60 परिजन भी तैयार, जानिए भारत में  अंग दान का क्या है स्टेटस

donation:आंध्र प्रदेश में एक कपल ने अंग दान करने का संकल्प लेकर अपनी शादी के दिन को खास बनाने का

फैसला किया है. कपल की इस पहल से प्रभावित होकर उनके करीब 60 रिश्तेदार भी अंगदान के

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लिए तैयार हो गए.सतीश कुमार और सजीवा रानी आगामी गुरुवार

यानी 29 दिसंबर 2022 को पूर्वी गोदावरी जिले के गांव वेलिवेन्नु में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं.

सतीश कुमार अंगदान का संकल्प लेकर शादी के दिन कुछ अच्छा करना चाहता है.

दुल्हन ने भी उनके नक्शेकदम पर चलने का फैसला किया. सतीश ने शादी के कार्ड पर

अंगदान को लेकर संदेश छापवाया है, ‘अंग दान करें – जीवन रक्षक बनें.’ उनके इस कदम की हर कोई सराहना कर

रहा है. इस पहल के बाद वर-वधू दोनों पक्ष के करीब 60 परिजन अंगदान करने के लिए राजी हो गए.

विशाखापत्तनम स्थित सावित्रीबाई फुले एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की चेयरपर्सन जी.।

सीतामहालक्ष्मी शादी के दिन अंगदान के फॉर्म प्राप्त करेंगी. सतीश कुमार ने विलिंग टू हेल्प फाउंडेशन के सहयोग से

अपनी शादी के दिन अंगदान कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया.

कई लोगों ने उनके कदम की सराहना की है. इस कदम से अंग दान के बारे में जागरुकता पैदा करने में मदद मिलेगी.

1000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट से कम

सतीश कुमार और सजीवा रानी के साथ ही उनके परिजनों का यह कदम अगर आपको अच्छा लगा है

तो आपको भी ऐसा कदम उठाना चाहिए. आपको जानकर हैरानी होगी कि एस्पर्ट्स के अनुसार भारत में हर साल चार

लाख ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन 1000 से भी

कम ऐसे ट्रांसप्लांट होते हैं, क्योंकि लोग अंगदान नहीं करते.

कौन नहीं कर सकता अंगदान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ग्लोबल ऑब्जर्वेटरी ऑन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन (GODT) के डाटा के अनुसार

साल 2021 में भारत में कुल 12 हजार, 259 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए. अगर आपको कैंसर है,

एचआईवी-एड्स है, हेपेटाइटिस बी है या आप किसी गंभीर संक्रमण से गुजर रहे हैं

तो आप अंगदान नहीं कर सकते. अन्यथा हर व्यक्ति अंगदान के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है.

ज्यादातर मामलों में मृत्यु के बाद ही अंगदान होता है, हालांकि,

किडनी और लिवर जैसे कुछ अंगों को व्यक्ति जिंदा रहते हुए भी दान कर सकता है.

मैंने अंगदान किया और करवाया भी

इस खबर को लिखते हुए मुझे लगा कि मैं अपनी कहानी भी आपको बता दूं, हो सकता है

आपको इससे प्रेरणा मिले. अंगदान के महत्व को समझते हुए मैंने स्वयं अपनी दोनों आंखें दान करने का संकल्प लिया है.

मेरे साथ मेरी पत्नी और माता-पिता ने भी अपनी दोनों आंखें दान देने का संकल्प लिया है.

साल 2018 में मेरे छोटे भाई का हार्ट डिजीज के चलते देहांत हो गया. अस्पताल में जब हम इस ट्रॉमा से गुजर रहे थे

तो दिल्ली स्थित गुरुनानक आई सेंटर का एक कर्मचारी हमारे पास आया और उसने हमें छोटे भाई की आंखें दान करने को

कहा. क्योंकि हम सब पहले ही अपनी आंखें दान करने का फैसला कर चुके थे,

इसलिए छोटे भाई की आंखें दान करने के लिए मैं, मेरे पिता और मां तुरंत मान गए.

आज मेरे छोटे भाई की आंखों से चार लोग इस खूबसूरत दुनिया को देख रहे हैं.

60 हजार हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत

इंडियन सोसाइटी फॉर हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट (INSHLT) के प्रेसिडेंट डॉ. संदीप अट्टावर का कहना है

कि लोग अंगदान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. इसको लेकर आज भी लोगों में अनभिज्ञता बनी हुई है.

उनका कहना है कि हर साल 60 हजार हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है,

लेकिन अंगदान  (donation) करने वाले नहीं मिलते, जिसकी वजह से अधिकतम 250 ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं.

जानकारों का कहना है कि विकसित देशों में भी अंगदान की मांग इसकी पूर्ति से अधिक है.

अगर गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को ही देखा जाए तो हर साल 20 हजार अंगदान हो सकते हैं.

लेकिन परिजन सही समय पर निर्णय ही नहीं ले पाते हैं. कई बार अंगदान के लिए उन्हें मनाने वाले सही व्यक्ति नहीं मिल

पाते हैं. 18 से 80 वर्ष की आयु के बीच का कोई भी व्यक्ति अंगदान कर सकता है.

किन अंगों को दान (donation) कर सकते हैं?

हमारे शरीर में 9-10 ऐसे अंग और टिश्यू होते हैं, जिन्हें किसी को दान किया जा सकता है.

इसमें किडनी, लिवर, हार्ट, पैंक्रियाज, फेफड़े, आंत, कोर्नियां (आंख), कान का बीच का हिस्सा, बोन मैरो,

टिश्यू (जैसे त्वचा), हार्ट वाल्व, मांसपेशियों के टेंडेन्स, लिंब आदि. भारत में 1994 में ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड

टिश्यू एक्ट (THOTA) पास हुआ था. THOTA के अनुसार लिविंग ऑर्गन यानी जिंदा रहते हुए

जिन अंगों का दान किया जाता है, उन्हें आप सिर्फ अपने करीबी परिजनों

(माता-पिता, खून के रिश्ते के भाई-बहन, दादा-दानी या नाना-नानी, बच्चों के साथ ही अपने पति या पत्नी) को ही दान कर सकते हैं.

क्या अंगदान भारत में कानूनी है?

जी हां, भारत में अंगदान पूरी तरह से कानूनी है और 1994 में ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यू

एक्ट (THOTA) के तहत इसे मान्यता प्राप्त है. इसी कानून के तहत

ब्रेन डेड व्यक्ति को मृत माना जाता है और उसका अंगदान किया जा सकता है.

अंगदान का मेरी सेहत पर क्या असर पड़ेगा?

जिंदा व्यक्ति कुछ ही अंगों को दान कर सकता है, जिसमें किडनी और लिवर शामिल हैं.

अंगदान के बाद भी व्यक्ति बहुत ही अच्छी और एक्टिव जिंदगी जी सकता है.

एक किडनी के साथ व्यक्ति अपना पूरा जीवन स्वस्थ तरीके से गुजार सकता है.

जहां तक बात लिवर की है तो लिवर दान करने के बाद यह फिर से अपने पुराने शेप में आ जाता है,

इसलिए लिवर दान करने में किसी तरह की कोई समस्या नहीं है. ब्रेन डेड और

हार्ट डेड व्यक्ति का कोर्निया, हार्ट वाल्व, त्वचा और हड्डियां भी दान की जा सकती हैं.

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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