Madanpur Devi: सबकी मनोकामना पूर्ण करती है माई मदनपुर वाली,जानें
Madanpur Devi: बगहा के मदनपुर में स्थित प्राचीन देवी माता का मंदिर 51 शक्ति पीठ में से एक है। मंदिर यूपी और बिहार से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर जंगल में प्रसिद्ध देवी मंदिर है।
यह मंदिर नेपाल, बिहार और यूपी के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इनके बीच में देवी मां के भक्त रहसू गुरू की कथा प्रचलित है।
जंगल में स्थित है माता का दरवार
मंदिर के बारे में प्रचलित है कि मदनपुर देवी (Madanpur Devi) स्थान पहले घना जंगल हुआ करता था। यह राजा मदन सिंह नाम के राज्याधीन था।
एक बार जंगल में शिकार करने राजा पहुंचे तो उनको पता चला कि एक रहसू गुरु उनके इन जंगलों के बीच बाघों के गले में सांप बांधकर खर पतवार की दंवरी करता है, उसमें से कनकजीर (सुगंधित धान की प्रजाति) निकलता है।
रहसू गुरु के बुलावे पर आईं मां जगदम्बा
सच्चाई जानने के लिए राजा अपने सैनिकों के साथ मौके पर पहुंचे तो नजारा देख हैरान रह गए। राजा ने हठ करते हुए रहसू गुरु से देवी को बुलाने का आदेश सुनाया।
रहसू गुरु ने राजा को समझाते हुए कहा कि ऐसी जिद्द न करें, बेवजह देवी मां को बुलाना संकट को मोल लेना होगा, देवी कुपित हुईं तो आपके राजपाट का सर्वनाश हो जाएगा।
समझाने के बाद भी राजा मदन सिंह जिद्द पर अड़े रहे। राजा ने रहसू गुरु को देवी को बुलाने को कहा और कहा कि अगर नहीं बुलाये तो तुम्हे मृत्यु दंड दिया जाएगा।
जब रहसू गुरु की जान पर बन आई तो भारी मन से देवी का आह्वान किया। कहा जाता है
मां जगदम्बा असम के कामख्या से चली और खनवार नामक स्थान पर पहुंची, वहां से थावें पहुंची।
पिंड़ी के रूप में स्थापित हो गईं देवी मां
देवी के आने से पहले साधु ने राजा को फिर से कहा कि राजा अभी भी अपना हठ करना बंद कर दीजिए , लेकिन फिर राजा नहीं माने इसके बाद अचानक भक्त रहसू का सिर फटा और देवी मां का हाथ उसके बाहर दिखाई दिया।
देवी के तेज अवतार को सहन नहीं कर पाए और राजा समेत सैनिक जमीन पर गिर पड़े। फिर कभी नहीं उठे।
बाद में राजा का परिवार व पूरा साम्राज्य ही तहस नहस हो गया। देवी मां जमीन में समां गईं और यहां पिंडी के रूप में स्थापित हो गई। धीरे-धीरे यह स्थान घनघोर जंगल से घिर गया।
श्रद्धालुओं के बीच चर्चित हैं गाय का पिंडी पर दूध गिराने की कहानी
श्रद्धालु वेदप्रकाश पाठक बताते हैं कि कालांतर युग में हरिचरण नामक व्यक्ति की नजर इस पिंडी पर पड़ी। उसने देखा कि एक गाय पिंडी पर अपना दूध गिरा रही है।
उन्होंने पिंडी के आसपास सफाई कर पूजा करना शुरू कर दी। कहा तो यह भी जाता है कि भक्ति से प्रसन्न देवी मां ने रखवाली के लिए एक बाघ प्रदान किया जो हरिचरण के साथ रहता था। धीरे-धीरे इसकी चर्चा चारों तरफ फैलती गई।
यहां दी जाती है बकरे और मुर्गे की बलि
श्रद्धालु बलराम पाठक बताते हैं कि पहले यहां पहुंचना काफी मुश्किल था, लेकिन अब दो दशक पहले गंडक नदी पर पनियहवा – बगहा पर पुल बन जाने से यूपी के भी लाखों श्रद्धालु देवी दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यहां मंदिर का निर्माण हो गया है। नेपाल, बिहार,उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी दर्शन के साथ ही शादी विवाह मुंडन आदि धार्मिक कार्य कराने यहां आते हैं। यहां बकरे और मुर्गे की बलि भी दी जाती है।
बोलिए सच्चे दरबार की.. जय जय
