Chaturmas : इस तारीख से शुरू हो रहा है चातुर्मास, 5 महीने तक नहीं हो सकेंगे ये सब काम!
Chaturmas: चातुर्मास को सनातन धर्म में विशेष माना गया है. 4 महीनों के इस समय में ज्यादा से ज्यादा वक्त
भगवान की भक्ति करने के लिए कहा गया है. हिंदू धर्म के अलावा जैन धर्म में भी चातुर्मास को बहुत महत्व दिया गया
है. चातुर्मास के दौरान जैन संत और मुनि यात्राएं नहीं करते हैं, बल्कि एक ही जगह पर रहकर भगवान की भक्ति करते हैं.
वहीं हिंदू धर्म में चातुर्मास के दौरान लगातार कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पड़ते हैं.
इसमें सावन सोमवार, रक्षाबंध, नागपंचमी, गणेशोत्सव, पितृ पक्ष, नवरात्रि आदि शामिल हैं.
साल 2023 में चातुर्मास इसलिए खास है क्योंकि यह 4 महीने की बजाय 5 महीनों का होगा.
चातुर्मास के समय को देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने के लिए बेहद शुभ माना गया है
लेकिन इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि करना वर्जित है.
5 महीने तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य
चातुर्मास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं. इस बार सावन महीने में अधिकमास लगने के कारण सावन 59 दिनों का होगा.
इस तरह सावन सोमवार भी 4 की जगह 8 होंगे. 5 महीने के लंबे चातुर्मास के कारण लोगों को मांगलिक कार्य करने के
लिए भी 5 महीने का इंतजार करना पड़ेगा. जैसे शादी-विवाह, मुंडन-जनेऊ, गृह निर्माण, गृह प्रवेश,
नया वाहन खरीदना, नई प्रॉपर्टी खरीदना, नया व्यापार या काम शुरू करने जैसे शुभ कार्य इन 5 महीनों में नहीं होंगे.
चातुर्मास 2023 प्रारंभ और समापन
हिंदू कैलेंडर के अनुसार देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है और देवउठनी एकादशी के दिन खत्म होता है.
इस साल देवशयनी एकादशी 30 जून को है. इस दिन से भगवान विष्णु 5 माह के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे.
फिर 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान जागेंगे और फिर मांगलिक कार्य शुरू होंगे.
साथ ही सनातन धर्म में भड़ली नवमी या भड़ल्या नवमी के दिन इस सीजन का आखिर मुहूर्त होता है.
इस साल भड़ल्या नवमी 29 जून को है, लिहाजा यह विवाह का आखिरी मुहूर्त होगा.
इसके बाद 24 नवंबर से विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू होंगे.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों ऐपर आधारित है. Computer jagat इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
