मां का आशीर्वाद सबके साथ, सबकी मुरादें पूरी करती है मां भगवती मदनपुर वाली
खड्डा-कुशीनगर : जिले के तहसील खड्डा अंतर्गत यूपी बिहार को जोड़ने वाली मार्ग
पनियहवा-मदनपुर स्थित मां मदनपुर देवीका या स्थान ऐतिहासिक प्रचलित है
जहां जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से मां के दरवाजे पर पहुंचता है
वह मनवांछित फल से परिपूर्ण होता है कहा जाता है कि पुराने जमाने में वहां
एक रहसु गुरु नाम के मां का एक भक्त रहते थे जोकि मां के वरदान से मनवांछित फल
प्राप्त हुआ था रहसूगुरु मां के आशीर्वाद से सिंह एवं बाघों का परिक्रमा करा कर कुस से
झिनवा,बहरनी अन्नबाहर निकालते थे, यह खबर जब वहां के राजा को लगी तो पता लगाने के लिए
मदनपुर आस्थान रहसू गुरु के पास पहुंचे और गुरु से पूछताछ किए,
गुरु ने बताएं यह सब मां भगवती की कृपा है तो राजा ने कहा हम तुम्हारे भगवती को देखना
चाहते हैं रहसू गुरु ने राजा को बहुत समझाया बुझाया की आप ऐसा ना करें
क्योंकि मां का दर्शन आपके विनाश कारक होंगे राजा ने गुरु की बात की है
अवहेलना कर दिया और हठ पकड़ लिया कि मैं तुम्हारे देवी को
देखना चाहता हूं इस पर गुरु ने कहा मां भगवती कामरु कामेख्या
मैं रहती है यहां आने पर तुम्हारे पूरे राज्य को विनाश कर देगी लेकिन राजा नहीं माने
इस पर गुरु ने मां भगवती को आराधना किया मां भगवती भक्तों का आराधना सुनके
अपने स्थान से चल दिया रास्ते में मां भगवती को गुरु ने रोक करके राजा को बहुत समझाया फिर
भी राजा नहीं माने मां भगवती जहां-जहां रुकी थी मां की वहां वहां पिंडी बन गई
जो कि आज भी उस पिंडी को दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं
लास्ट मे मां भगवती ने रहसू गुरु का सर फोड़ कर मां भगवती अपना हाथ का कंगन दिखाई
तथा राजा के पूरे राज्य सहित खानदान को नष्ट कर दिया राजा की रानी गर्भवती थी उस समय
रानी अपने मायके गई थी रानी के गर्भ में बच्चा था बहुत मिलती भाव करने पर वह बच्चा बच गया
पैदा होने पर उस बच्चे का नाम मारकंडेय सिंह रखा गया मारकंडेय सिंह हर
साल मां के अस्थान पर एक मनुष्य का बलि देते थे धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार 7भैंसो का वलि
देने लगे इस समय भी उनके खानदान के लोग 7 बकरे का बलि देते हैं
जो भी भक्त मां के श्रद्धा भाव से दरबार में पहुंचता है वह मनवांछित फल को प्राप्त होता है
