politics:मैनपुरी फतह के बाद अखिलेश यादव का यूपी निकाय चुनाव में कितना सटीक होगा यह दांव? जानिए क्या है फार्मूला
politics:मैनपुरी फतह के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव यूपी निकाय चुनाव के लिए
ताकत झोंकने में जुट गए हैं। अखिलेश यूपी उपचुनाव की रणनीति पर ही यूपी निकाय चुनाव की जीत की
पिच तैयार कर रहे हैं। मैनपुरी उपचुनाव में सैफई में कैंप करने वाला मुलायम का कुनबा जीत के बाद भी पार्टी और
मजबूत करने लगा है। उपचुनाव में मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र की गलियों में घूम-घूम कर जनता और कार्यकर्ताओं से मिलने
वाले अखिलेश सोमवार को दिल्ली से लौटकर सीधे लखनऊ नहीं आए बल्कि सैफई अपने आवास पर पहुंच गए थे।
मंगलवार की सुबह अखिलेश यादव ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
दो घंटे तक मैनपुरी, इटावा के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत के दौरान उनके हालचाल लिए
और निकाय चुनाव के बाबत तैयारियों के बारे में चर्चा की। दोपहर में वह मैनपुरी के करहल चले गए,
करहल में कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मैनपुरी फतह के बाद अखिलेश यादव का यूपी निकाय चुनाव में
कितना सटीक होगा यह दांव? यह तो चुनावी नतीजे बताएंगे।
परिवार की एका से पार्टी भी मजबूत
आपको बता दें कि मैनपुरी उपचुनाव के बहाने सपा परिवार फिर से एकजुट हो गया और
अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय कर दिया।
डिंपल को सबसे ज्यादा एक लाख छह हजार 497 मतों की बढ़त शिवपाल सिंह यादव के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
जसवंत नगर से ही मिली थी। चाचा-भतीजे के मिलन को समाजवादी परिवार के लिए बेहतर माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे न सिर्फ मुलायम परिवार बल्कि समाजवादी परिवार मजबूत होगा।
प्रधानी की तरह मैनपुरी में चुनाव लड़ी सपा
मैनपुरी में ऐन चुनाव तक सांगठनिक ढांचा ही आधा-अधूरा था। तकरीबन 500 बूथ ऐसे थे,
जहां पार्टी का बस्ता उठाने वालों का भी संकट था। सपा ने इस चुनाव को प्रधानी की तरह लड़ा।
भाजपा यहां 2019 में मिले वोटों के आंकड़ों से भी काफी दूर रही।
संगठन और रणनीतिक (politics) स्तर पर मैनपुरी ही नहीं खतौली में भी भाजपा की कमजोरी चुनावी नतीजों ने सामने ला दी है।
