lithium: भारत के हाथ लग गया किस्मत बदलने वाला खजाना, नए युग की होगी शुरुआत!

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lithium: भारत के हाथ लग गया किस्मत बदलने वाला खजाना, नए युग की होगी शुरुआत!

lithium: भारत के इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के भंडार पाए गए हैं।

माइन्स के सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया, ”पहली बार लिथियम के भंडार मिले हैं और वह भी

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जम्मू और कश्मीर में।” इस भंडार के 60 लाख टन के होने की संभावना है।

खजाना कहे जाने वाला लिथियम का भंडार मिलने को नई युग की शुरुआत माना जा रहा है।

हालांकि, इससे पहले कर्नाटक के मांड्या जिले में 1600 टन का लिथियम भंडार पाया गया था,

लेकिन वह किसी भी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए नहीं था। ऑस्ट्रेलिया,

चिली और चीन लिथियम के तीन सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक हैं।

लिथियम (lithium) एक ऐसी धातु जिसके बड़ी मात्रा में मिलने से देशों के भाग्य तक बदल जाते हैं।

अब भारत में भी जब इसका भंडार मिला है तो आने वाले समय में कई दिक्कतों को दूर किया जा सकता है।

ईवी सेक्टर को मिल सकता है बूस्ट, 30 फीसदी तक होगी वृद्धि!

भारत में लिथियम के मिलने से माना जा रहा है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के सेक्टर को बूस्ट मिल सकता है।

लिथियम (lithium) की बैटरियों का इस्तेमाल ईवी में किया जाता है और पेट्रोल व डीजल के महंगे होने के चलते

कार कंपनियां इन दिनों ईवी कारों पर काफी जोर दे रहे हैं। देश-दुनिया की सभी प्रमुख कार कंपनियां

नई-नई ईवी कारें लॉन्च कर रही हैं। अभी तक भारत लीथियम के इम्पोर्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना पर

निर्भर रहा है। रिचार्जेबल बैटरी में लिथियम एक प्रमुख तत्व है जो स्मार्टफोन और लैपटॉप,

साथ ही इलेक्ट्रिक कारों जैसे कई गैजेट्स के लिए बहुत ही जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है

कि यह खोज ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों के तहत

2030 तक प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि करने में भारत की मदद कर सकती है।

सबसे अधिक मांग वाले खनिजों में एक है लिथियम

लिथियम विश्व स्तर पर सबसे अधिक मांग वाले खनिजों में से एक है।

इसकी खोज पहली बार 1817 में जोहान अगस्त अरफवेडसन द्वारा की गई थी।

लिथियम (lithium) शब्द ग्रीक में लिथोस से आया है, जिसका अर्थ है पत्थर।

सबसे कम घनत्व वाली धातु, लिथियम, पानी के साथ तेजी से रिएक्ट करती है और प्रकृति में जहरीली होती है।

लिथियम (lithium) स्वाभाविक रूप से ग्रह पर नहीं बना। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है

कि यह एक ब्रह्मांडीय तत्व है जो चमकीले तारकीय विस्फोटों से बना है जिसे नोवा कहा जाता है।

नासा द्वारा फंडेड एक स्टडी से पता चला है कि बिग बैंग ने ब्रह्मांड के शुरुआत में लिथियम की एक छोटी मात्रा का

निर्माण किया था। अधिकांश लिथियम परमाणु प्रतिक्रियाओं में निर्मित होता है जो नोवा विस्फोटों को शक्ति देता है।

डिजिटलाइजेशन में लिथियम (lithium) बैटरी का अहम योगदान

लिथियम ने दुनियाभर में क्रांति ला दी है। इंडिया टुडे के अनुसार, वह लिथियम-आयन बैटरी ही है,

जिसने इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग, डिजिटलीकरण में क्रांति ला दी है और अब दुनिया को क्लीन एनर्जी की

ओर ले जा रही है। नेचर की एक स्टडी में पाया गया कि लिथियम-आयन बैटरी का एमरजेंस और

डॉमिनेंस अन्य रिचार्जेबल बैटरी सिस्टम की तुलना में उनके उच्च ऊर्जा घनत्व के कारण होता है।

वहीं, ईवी की बढ़ती मांग के साथ लिथियम के वैश्विक भंडार पर बहस जोर पकड़ रही है।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के अनुसार, 2025 तक लिथियम की कमी हो सकती है।

लिथियम का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी होता है।

यह हमारे फोन, सौलर पैनल्स और अन्य रेनेवेबल टेक्नॉलोजीस के लिए जरूरी होता है।

एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में मिले लिथियम के भंडार के चलते एक नई युग की शुरुआत हो सकती है।

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Ajay Sharmahttps://computersjagat.com
Indian Journalist. Resident of Kushinagar district (UP). Editor in Chief of Computer Jagat daily and fortnightly newspaper. Contact via mail computerjagat.news@gmail.com

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