CBI :लखनऊ के ये 21 अफसर आए CBI के रडार पर, हो सकती है पूछताछ, जानें पूरा मामला
CBI :अंसल एपीआई बिल्डर की सुशांत गोल्फ सिटी का नक्शा और लेआउट पास करने वाले एलडीए के 21 अफसर और इंजीनियर सीबीआई की रडार पर हैं। इन्हीं अफसरों-इंजीनियरों ने हाईटेक टाउनशिप से जुड़े काम कराए थे। इसमें प्रवर्तन विभाग के भी कुछ इंजीनियरों से पूछताछ होगी। क्योंकि जब अंसल ने जमीन का अधिग्रहण नहीं किया था तो बिल्डर ने कैसे सिंचाई विभाग की जमीन पर विकास करा दिया।अंसल एपीआई बिल्डर ने सिंचाई विभाग की नहर की भूमि पर प्लाटिंग कर करोड़ों की जमीन बेच डाली है। उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। हिन्दुस्तान ने पड़ताल की तो पता चला कि वर्ष 2006 से अंसल एपीआई की टाउनशिप के लिए एलडीए अधिकारियों व इंजीनियरों ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2016 तक कई बार टाउनशिप का दायरा बढ़ाया गया और ले आउट भी बदला गया। लेकिन सिंचाई विभाग की जमीन को अलग नहीं किया गया। अगर जमीन को अलग कर दिया होता तो बिल्डर इसे अपनी योजना में शामिल नहीं कर पाता।
2007 का पास नक्शा 2015 में बदल दिया
एलडीए ने बिल्डर के पहले फेज के 1765 एकड़ जमीन का डीपीआर मैप 11 अप्रैल 2007 को पास किया था। इसमें उसने 3704 प्लाट, 9228 फ्लैट, 382 ईडब्ल्यूएस व 413 एलआईजी के मकान बनाने का प्रस्ताव दिया था। बिल्डर का यह मैप 22 सितम्बर 2015 को बदल दिया गया। फिर बिल्डर ने इसमें 3704 की जगह 4971 प्लाट कर दिया। 9228 फ्लैट की जगह 18597 फ्लैट कर दिया। जबकि ईडल़्य्एस व एलआई के मकान नहीं बढाए।
कब कितनी जमीन का बिल्डर को लाइसेंस दिया
-1765 एकड़ का लाइसेंस 22 मई 2005 को दिया गया
-दूसरे फेज में पांच साल बाद 18 मई 2010 को 3530 एकड़ जमीन का लाइसेंस दिया
-तीसरे फेज में 23 मई 2015 को 6465 एकड़ जमीन का लाइसेंस दिया
-अब फिर 2022 में घटाकर 4237.86 एकड़ जमीन कर दिया गया
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