Plantation:विश्व पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ मां के नाम 2.0 थीम के तहत वृक्षारोपण व जागरूकता कार्यक्रम
Plantation:विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कुशीनगर जिले में “एक पेड़ मां के नाम 2.0” थीम के तहत पर्यावरण जागरूकता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस मौके पर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी ने प्रकृति को हरा-भरा, स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने का संदेश दिया।
विकास खंड दुदही के ग्राम बांसगांव चौरिया और खैरवा में हरिशंकरी (पीपल, पाकड़, बरगद) पौधों का रोपण किया गया
साथ ही जनपदवासियों से अपने घरों के समीप इन वृक्षों को लगाने और मां की तरह उनकी संरक्षा करने की अपील की गई।
जिलाधिकारी ने कहा, “सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं।
मैं अपील करता हूं कि अपने आसपास पेड़ अवश्य लगाएं। ये पेड़ भविष्य में छाया, फल और जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करेंगे।
जिले में 37 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य
इनकी देखभाल बच्चों की तरह करें।” उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 37 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसे और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रत्येक ग्राम सभा में एक स्थान चिह्नित किया जा रहा है, जहां हरिशंकरी पौधे लगाए जाएंगे।
इन स्थानों पर भविष्य में चौपाल संस्कृति को पुनर्जनन देने के लिए छायादार वृक्षों के नीचे ग्राम स्तर पर विवादों का समाधान किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा, “पेड़ लगाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उनकी संरक्षा और जीवित रखना।
आइए, हम सब संकल्प लें कि अपनी मां के नाम एक पेड़ लगाएंगे और उसकी देखभाल करेंगे।
उन्होंने आगामी वन महोत्सव में भी वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और वनाधिकारियों को पेड़ों की छाया में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया।
विवाद रहित राजस्व ग्राम अभियान
इसके साथ ही, जिलाधिकारी ने “विवाद रहित राजस्व ग्राम अभियान” की घोषणा की, जिसमें प्रत्येक ग्राम में भूमि विवाद रजिस्टर बनाया जाएगा।
ग्राम स्तर पर ही विवादों का निवारण करने का प्रयास होगा, और आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों का सहयोग लिया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य गांव की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करना है।
कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी वरुण सिंह, खंड विकास अधिकारी दुदही रामराज कुशवाहा, देवरिया सांसद प्रतिनिधि, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आमजन से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई, ताकि पर्यावरण संरक्षण और चौपाल संस्कृति को पुनर्जनन देने का लक्ष्य प्राप्त हो सके।
